Friday, February 27, 2026

 ‘हमें तो पहले से पता था…’ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद पहली बार बोले शंकराचार्य, कोर्ट के एक सवाल ने पलट दिया पूरा केस!

इलाहाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। कोर्ट के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने बहुत ही दार्शनिक और सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। स्वामी जी ने कहा, “हमें पता था कि झूठ की अपनी ताकत होती है, लेकिन सत्य की ताकत भी कम नहीं है। झूठ की शक्ति केवल परेशान करने का काम करती है, जबकि सत्य की शक्ति अंततः विजय दिलाती है और विरोधियों को पराजित करती है। हमें विश्वास था कि झूठ की उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस मामले के कानूनी पहलुओं पर अपने वकीलों से विस्तृत चर्चा करने के बाद ही कोई बड़ा बयान देंगे। उनके चेहरे पर आई शांति ने यह साफ कर दिया कि फिलहाल के लिए एक बड़ा मानसिक दबाव टल गया है।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख और यूपी सरकार के नरम तेवर: क्यों मिली राहत?

आज की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में कई ऐसी बातें हुईं जिसने इस केस की दिशा बदल दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शंकराचार्य की अग्रिम जमानत का बहुत कड़ा विरोध नहीं किया। सरकारी पक्ष ने केवल मामले की जांच जारी होने की बात कही और याचिका की ‘पोषणीयता’ (कि सीधे हाईकोर्ट क्यों आए) पर सवाल उठाए। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी के अनुसार, कोर्ट ने यूपी सरकार से एक तीखा सवाल भी पूछा— “जब शिकायत मिली थी, तो बच्चों को तुरंत सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं भेजा गया?” अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि बच्चे एक ऐसे व्यक्ति (आशुतोष पांडेय) के साथ क्यों हैं जिसका खुद का क्रिमिनल बैकग्राउंड है। इन बिंदुओं ने शंकराचार्य के पक्ष को मजबूती दी और उनकी व उनके शिष्य मुकुंदानंद की गिरफ्तारी पर मार्च के तीसरे हफ्ते तक रोक लगा दी गई।

शिकायत में झोल और मार्कशीट का ‘सच’: आशुतोष पांडेय के दावों की खुली पोल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर पाया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बच्चा साल 2024 से ही आश्रम में बंधक बनाकर रखा गया था। लेकिन बचाव पक्ष ने कोर्ट में बच्चे की साल 2025 की मार्कशीट पेश कर दी, जिसमें वह एक ‘संस्थागत छात्र’ के रूप में पढ़ाई करता दिख रहा है। कोर्ट में यह दलील दी गई कि अगर कोई बंधक होता, तो वह स्कूल जाकर परीक्षा कैसे देता? यही वह मुख्य आधार बना जिसने पुलिस की जांच और शिकायतकर्ता के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए। इसी ‘फर्क’ की वजह से अदालत ने शंकराचार्य को बड़ी राहत देना उचित समझा, हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि पुलिस पूछताछ कर सकती है और शंकराचार्य को जांच में पूरा सहयोग करना होगा।

मार्च के तीसरे हफ्ते का इंतजार: अब क्या होगा अगला कानूनी कदम?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई मार्च के तीसरे हफ्ते में तय की है। तब तक के लिए फैसला ‘सुरक्षित’  रखा गया है। इसका मतलब यह है कि होली के दौरान शंकराचार्य को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जो उनके समर्थकों के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी ने इसे ‘सत्य की जीत’ करार दिया है और न्यायपालिका का आभार जताया है। हालांकि, कानूनी तलवार अभी पूरी तरह से हटी नहीं है। मार्च के तीसरे हफ्ते में जब कोर्ट अपना अंतिम आदेश सुनाएगा, तब यह तय होगा कि यह अग्रिम जमानत स्थायी होती है या केस में कोई नया मोड़ आता है। फिलहाल, प्रयागराज से लेकर वाराणसी तक के आश्रमों में इस आदेश के बाद उत्साह का माहौल है और सभी की नजरें अब पुलिस की अगली पूछताछ और मार्च के फैसले पर टिकी हैं।

Read More-15 दिन की रोक के बाद बड़ा उलटफेर! ‘द केरल स्टोरी 2’ पर हाईकोर्ट का चौंकाने वाला फैसला

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img