Thursday, February 26, 2026

लाल बारादरी के बंद दरवाजों के पीछे क्या है सच्चाई? नमाज विवाद पर लखनऊ यूनिवर्सिटी में हिंदू-मुस्लिम छात्र एक साथ उतरे सड़क पर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लखनऊ यूनिवर्सिटी में लाल बारादरी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा छात्र आंदोलन बनता दिख रहा है। परिसर में कुछ छात्रों द्वारा नमाज पढ़े जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोटिस जारी किया और लाल बारादरी के दरवाजे बंद कर दिए। इसी फैसले के विरोध में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन का ऐलान किया है। खास बात यह रही कि मुस्लिम छात्रों के समर्थन में कई हिंदू छात्र भी खुलकर सामने आए हैं। परिवर्तन चौराहा से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकालकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई है। प्रशासन ने एहतियातन सुरक्षा बढ़ा दी है और हालात पर नजर रखी जा रही है।

नोटिस और बैन से भड़की नाराजगी, छात्रों ने खोला मोर्चा

हाल ही में लाल बारादरी परिसर में नमाज पढ़ने की घटना सामने आई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से संबंधित छात्रों को नोटिस जारी किया गया। प्रशासन का तर्क है कि परिसर में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि से विवाद की स्थिति बन सकती है, इसलिए नियमों के तहत कार्रवाई की गई। साथ ही शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाल बारादरी के दरवाजे अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।

इस फैसले के बाद छात्र संगठनों में नाराजगी बढ़ गई। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय विचारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्थान है, इसलिए किसी भी छात्र के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि नोटिस और दरवाजे बंद करने का कदम जल्दबाजी में उठाया गया। उनका मानना है कि संवाद के जरिए समाधान निकाला जा सकता था।

छात्रों का समर्थन, विरोध में उतरे अन्य संगठन भी

इस मामले ने तब नया मोड़ लिया जब कुछ हिंदू छात्रों ने भी मुस्लिम छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई। उनका कहना है कि यह मुद्दा किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और समान व्यवहार का है। कई छात्र संगठनों ने संयुक्त रूप से परिवर्तन चौराहा से मार्च निकालने की घोषणा की है, जो जिलाधिकारी कार्यालय तक जाएगा। वहां प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर लाल बारादरी को फिर से खोलने और नोटिस वापस लेने की मांग की जाएगी।

दूसरी ओर, Bajrang Dal के कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। परिसर के अंदर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी को भी माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

प्रशासन सतर्क, समाधान की राह पर सबकी नजरें

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि परिसर में शांति और अनुशासन बनाए रखना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी छात्रों के लिए समान नियम लागू होते हैं। फिलहाल प्रदर्शन को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

छात्र नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे। उनका जोर इस बात पर है कि लाल बारादरी को फिर से खोला जाए और नोटिस वापस लिया जाए। इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक गतिविधियों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक अधिकारों के बीच संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं। फिलहाल, लखनऊ विश्वविद्यालय का यह मुद्दा प्रदेश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें आगामी घटनाक्रम पर टिकी हैं।

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