‘हिम्मत है तो गलती मान लीजिए’… कांग्रेस ने ममता को दिया मंच पर आने का न्योता, साथ रखी एक बड़ी शर्त

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 21 जुलाई को आयोजित होने वाले कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुला निमंत्रण देकर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी को उस ऐतिहासिक आंदोलन और उससे जुड़े शहीदों को याद करने के लिए कार्यक्रम में आना चाहिए। इसके साथ ही कांग्रेस ने यह भी कहा कि 1990 के दशक में पार्टी छोड़ने के फैसले पर ममता को खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है और दोनों दलों के पुराने रिश्तों की चर्चा फिर से होने लगी है।

कांग्रेस ने क्यों दिलाई पुराने फैसले की याद?

बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने कहा कि 21 जुलाई 1993 का आंदोलन कांग्रेस और युवा कांग्रेस के नेतृत्व में हुआ था। उनके अनुसार, इस आंदोलन का इतिहास किसी भी तरह से बदला नहीं जा सकता। कांग्रेस का दावा है कि उस समय ममता बनर्जी भी पार्टी का महत्वपूर्ण चेहरा थीं और आंदोलन में उनकी बड़ी भूमिका थी। इसलिए पार्टी चाहती है कि उस दौर की घटनाओं को सही संदर्भ में याद किया जाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इतिहास को स्वीकार करना भी जरूरी है। इसी वजह से ममता बनर्जी को कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।

 शहीद दिवस को लेकर क्यों खास है 21 जुलाई?

21 जुलाई का दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 1993 में मतदाता पहचान पत्र को लेकर हुए एक आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई में 13 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की प्रमुख नेताओं में शामिल थीं और आंदोलन का नेतृत्व कर रही थीं। बाद में यह घटना बंगाल की राजनीति का एक बड़ा प्रतीक बन गई। हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है। तृणमूल कांग्रेस भी बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करती है और अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करती है। यही कारण है कि इस दिन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी बढ़ जाती है।

क्या बदलेगा कांग्रेस और टीएमसी का राजनीतिक समीकरण?

कांग्रेस के हालिया बयान को कई राजनीतिक जानकार आने वाले चुनावों और विपक्षी राजनीति के संदर्भ में भी देख रहे हैं। हालांकि अभी तक ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस निमंत्रण पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि ममता कार्यक्रम में आती हैं तो यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश होगा। दूसरी ओर, टीएमसी लंबे समय से अपनी अलग राजनीतिक पहचान पर जोर देती रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के इस निमंत्रण और बयान पर ममता बनर्जी क्या रुख अपनाती हैं। फिलहाल 21 जुलाई के कार्यक्रम से पहले बंगाल की राजनीति में इस मुद्दे ने नई चर्चा छेड़ दी है और सभी की नजरें दोनों दलों की अगली रणनीति पर टिकी हैं।

Read More-नोएडा के ममूरा गांव में आग का भीषण तांडव, दो लोगों की गई जान, 50 परिवारों का रेस्क्यू जारी

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img