बिहार की राजनीति में इन दिनों एक वीडियो को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मामला राज्य सरकार में मंत्री केदार गुप्ता के पोते अभिराज से जुड़ा है, जिनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अभिराज कथित तौर पर सरकारी सुरक्षा कर्मियों और एस्कॉर्ट वाहन के साथ रील बनाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जैसे-जैसे वीडियो ज्यादा लोगों तक पहुंचा, वैसे-वैसे इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया और विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार पर साधा निशाना
वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल सरकारी कामों के लिए होना चाहिए और यदि उनका इस्तेमाल निजी प्रचार या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए किया गया है तो इसकी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को लेकर सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सत्ता से जुड़े लोगों के परिजन सरकारी सुविधाओं का प्रभाव दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष ने यह भी कहा कि जनता से जुड़े कई मुद्दे अभी भी समाधान का इंतजार कर रहे हैं, जबकि ऐसे मामलों की वजह से सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। इस बयानबाजी के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
वीडियो हटाने की कोशिश, अकाउंट किया गया प्राइवेट
जानकारी के अनुसार, वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जाने के बाद तेजी से वायरल हुआ। मामला बढ़ता देख संबंधित अकाउंट की गोपनीयता सेटिंग बदल दी गई और उसे प्राइवेट कर दिया गया। हालांकि तब तक वीडियो कई लोगों तक पहुंच चुका था और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जा रहा था। इस बीच लोगों के बीच यह सवाल भी उठने लगा कि आखिर सरकारी सुरक्षा कर्मियों के साथ बनाई गई इस रील का उद्देश्य क्या था। कुछ लोगों ने इसे सामान्य सोशल मीडिया गतिविधि बताया, जबकि कई लोगों ने सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर चिंता जताई। फिलहाल वीडियो को लेकर बहस लगातार जारी है और लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।
मंत्री ने दी सफाई, बोले- बच्चा है, विवाद न बनाया जाए
विवाद बढ़ने के बाद मंत्री केदार गुप्ता ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वीडियो नया नहीं बल्कि पुराना है और इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। मंत्री का कहना है कि उनका पोता अभी छोटा है और बच्चों की गतिविधियों को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मामले को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है। दूसरी ओर, विपक्ष अपनी मांग पर कायम है और पूरे मामले की जांच की बात कर रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर प्रशासनिक स्तर पर भी कोई कदम उठाया जाता है। फिलहाल, एक सोशल मीडिया रील ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
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