यूपी चुनाव 2027 में क्या AI दिलाएगा BJP को जीत? आखिर क्या है ‘कमल साथी’ ऐप, कैसे बनेंगा गेमचेंजर?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच BJP से जुड़ा एक AI आधारित मोबाइल ऐप ‘कमल साथी’ चर्चा में है। बताया जा रहा है कि यह ऐप पार्टी के कुछ विधायकों और संगठन से जुड़े लोगों के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य विधानसभा स्तर पर चुनावी प्रबंधन को आसान बनाना है। यह कोई सार्वजनिक ऐप नहीं है, बल्कि सीमित लोगों के उपयोग के लिए बनाया गया एक आंतरिक प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है। इस ऐप के जरिए विधायक अपने क्षेत्र से जुड़ी कई तरह की जानकारी एक ही जगह देख सकते हैं। चुनावी रणनीति में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इस ऐप को अहम माना जा रहा है।

एक क्लिक पर मिल सकती है विधानसभा से जुड़ी अहम जानकारी

सूत्रों के अनुसार, कमल साथी ऐप में विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची, नए और हटाए गए मतदाताओं का रिकॉर्ड और बूथ स्तर की कई जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा ऐप के जरिए कार्यकर्ताओं को भी जोड़ा जा सकता है, ताकि वे अपने-अपने बूथ की जानकारी अपडेट कर सकें। बताया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं की गतिविधियों की रिपोर्ट भी ऐप के डैशबोर्ड पर दिखाई देती है। वहीं नए मतदाता जोड़ने या नाम हटाने से जुड़े फॉर्म के लिए भी ऐप से संबंधित लिंक उपलब्ध कराया गया है। इससे चुनावी कामकाज को व्यवस्थित करने में आसानी हो सकती है।

AI तकनीक से तैयार होने का दावा

जानकारी के मुताबिक, इस ऐप को मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी संजीव सिंह की देखरेख में विकसित किया गया है। उन्होंने भी इस तरह के एक आंतरिक चुनावी प्रबंधन ऐप पर काम करने की बात स्वीकार की है। हालांकि उन्होंने इसके फीचर्स या उपयोगकर्ताओं की संख्या को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। दूसरी ओर, बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि यह पार्टी का आधिकारिक ऐप नहीं है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने भी इसे एक आंतरिक प्लेटफॉर्म बताया है। ऐसे में ऐप को लेकर अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

2027 के चुनाव में तकनीक निभा सकती है अहम भूमिका

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों में डेटा और तकनीक की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ने वाली है। यदि इस तरह के डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग होता है, तो चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर की रणनीति को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि यह देखना बाकी है कि इस ऐप का इस्तेमाल कितने विधायक करते हैं और यह चुनावी मैदान में कितना असर दिखा पाता है। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में AI और डिजिटल तकनीक की मौजूदगी पहले के मुकाबले कहीं अधिक दिखाई दे सकती है।

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