पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले को लेकर सियासी माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। इस मामले पर पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता और मंत्री दिलीप घोष की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी नेता के साथ इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए और कानून हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि राज्य में पहले के वर्षों में आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उनके अनुसार, राजनीतिक हिंसा और तनाव की घटनाएं लंबे समय से बंगाल की राजनीति का हिस्सा रही हैं।
‘15 साल जनता ने भुगता है’, बोले दिलीप घोष
दिलीप घोष ने कहा कि पिछले कई वर्षों में जनता ने बहुत कुछ झेला है और कई जगहों पर कानून व्यवस्था कमजोर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले के समय में कई इलाकों में लोगों को परेशान किया जाता था और राजनीतिक दबाव का माहौल रहता था। उन्होंने कहा कि जनता अब धीरे-धीरे अपनी नाराजगी जाहिर कर रही है और इसका असर चुनावी नतीजों में भी देखने को मिलता है। दिलीप घोष ने दावा किया कि हाल के चुनावों में टीएमसी का प्रदर्शन कमजोर रहा है, जिसे जनता के मूड का संकेत माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में जवाबदेही जरूरी है और जनता सब देखती है।
अंडे के हमले पर तंज, बोले- ‘इतने नाजुक हैं कि चोट लग गई’
अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले के संदर्भ में दिलीप घोष ने तंज कसते हुए कहा कि अगर एक अंडे से ही चोट लग गई, तो यह काफी हैरान करने वाली बात है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के दौरान उन्होंने खुद भी कई बार हमले झेले हैं, लेकिन कभी इसे बड़े मुद्दे की तरह नहीं उठाया। दिलीप घोष ने कहा कि विपक्ष में काम करना आसान नहीं होता और उन्होंने भी अपने राजनीतिक जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। उन्होंने दावा किया कि उनके शरीर पर आज भी उन घटनाओं के निशान मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने कभी इसे सार्वजनिक मुद्दा नहीं बनाया।
पुरानी घटनाओं का जिक्र, पुलिस और व्यवस्था पर सवाल
दिलीप घोष ने बातचीत के दौरान कई पुरानी घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन पर और उनकी टीम पर हमले हुए थे, जिसमें गाड़ियों पर पत्थरबाजी की गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय कई कार्यकर्ता प्रभावित हुए थे। साथ ही उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, कई मामलों में शिकायतें दर्ज नहीं की गईं और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में राजनीतिक हिंसा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर लगातार बहस होती रही है। फिलहाल इस बयान के बाद बंगाल की सियासत में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
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