Sunday, March 1, 2026

दक्षिणी ईरान में 57 स्कूली छात्राओं की मौत! इजरायल-अमेरिका हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात

मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए ताबड़तोड़ मिसाइल हमलों के बाद अब दक्षिणी ईरान से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक हमले में 57 स्कूली छात्राओं की मौत हो गई है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान ने इन हमलों को सीधा आक्रमण करार दिया है, जबकि इजरायल ने इसे सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है। हालात ऐसे हैं कि दोनों देशों के बीच खुली जंग की आशंका जताई जा रही है।

किन शहरों पर हुआ हमला, क्या है इजरायल का दावा?

जानकारी के अनुसार इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त अभियान के तहत तेहरान, खोर्रमाबाद, कौम और इस्फहान जैसे शहरों को निशाना बनाया। इजरायली रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए की गई। इजरायल ने अपने देश में इमरजेंसी घोषित कर नागरिकों को शेल्टर के पास रहने की सलाह दी है। खासतौर पर तेल अवीव, हाइफा और गैलिली क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है। इजरायल का कहना है कि ईरानी सैन्य ठिकानों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, ताकि संभावित हमलों को रोका जा सके। हालांकि नागरिक हताहतों की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

ईरान का जवाबी हमला और खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया

इजरायली हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के कई शहरों पर मिसाइलें दागीं। ईरानी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने सीमित संसाधनों का इस्तेमाल किया है और जरूरत पड़ने पर और सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की खबर है। ईरान के एक वरिष्ठ जनरल ने चेतावनी दी है कि अभी केवल ‘स्टॉक’ मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है और भविष्य में “अनदेखे हथियार” भी प्रयोग में लाए जा सकते हैं। इस बयान ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंका को लेकर वैश्विक चिंता और बढ़ा दी है।

ट्रंप का बयान, दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अमेरिका ईरान को परमाणु बम विकसित नहीं करने देगा। उन्होंने हमले को “रोकथाम की कार्रवाई” बताया। अमेरिका के इस रुख ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है, लेकिन जमीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक रास्ता नहीं निकला तो यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अलर्ट मोड में हैं और दुनिया की नजरें इस टकराव पर टिकी हुई हैं।

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