टोल बंद होने से सरकार को कितना नुकसान?
टोल बंद होने के बाद लोगों के मन में सवाल है कि सरकार को कितने पैसे का नुकसान होगा। इस एक्सप्रेसवे पर कार, जीप और वैन के लिए एक तरफ का टोल करीब 275 रुपये रखा गया था। अगर टोल वसूली जारी रहती तो इससे सरकार को अच्छी कमाई होती। लेकिन टोल बंद होने का पूरा नुकसान सीधे सरकार को नहीं उठाना पड़ेगा। जानकारी के मुताबिक, NHAI की व्यवस्था के तहत इस नुकसान की भरपाई निर्माण से जुड़ी कंपनी को करनी होगी। यानी यात्रियों से अभी टोल नहीं लिया जाएगा, लेकिन टोल बंद रहने के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी ठेकेदार पर होगी। इससे सरकार के राजस्व पर सीधा बड़ा असर पड़ने से बचाने की कोशिश की गई है।
सड़क ठीक करने में करीब 3 करोड़ रुपये खर्च होंगे
एक्सप्रेसवे के खराब हिस्सों को ठीक करने में करीब 3 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। NHAI ने निर्माण कंपनी को सिर्फ गड्ढे भरने के बजाय सड़क को सही तरीके से दोबारा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि जहां सड़क के नीचे की परत या मिट्टी में समस्या है, वहां भी काम किया जाएगा। करीब 6 लेन वाले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को बनाने में लगभग 4,200 करोड़ से 4,700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ था। लेकिन कुछ ही समय बाद सड़क के कुछ हिस्सों में धंसने की शिकायत आने लगी। इसके बाद सड़क बनाने के तरीके और पानी की निकासी को लेकर सवाल उठने लगे।
बारिश के बाद सामने आई समस्या, जिम्मेदारों पर कार्रवाई
शुरुआती जांच में सड़क खराब होने के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। इनमें भारी बारिश, पानी की सही निकासी नहीं होना और मिट्टी का ठीक से मजबूत नहीं किया जाना शामिल है। कुछ जगहों पर रिटेनिंग वॉल के टूटने की बात भी सामने आई है। हालांकि सड़क धंसने की सही वजह पूरी जांच के बाद ही सामने आएगी। मामले में NHAI ने निर्माण कंपनी को नोटिस दिया है। इसके अलावा प्रोजेक्ट से जुड़े एक मैनेजर को भी हटाया गया है। जिम्मेदार पाए जाने वाले इंजीनियरों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। NHAI का कहना है कि सड़क की कमियों को जल्द ठीक किया जाना जरूरी है, ताकि लोगों को सुरक्षित सफर मिल सके।
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