Shimla Zila Parishad Election: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला परिषद में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। करीब 102 दिनों के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में बीजेपी ने पहली बार दोनों पदों पर जीत हासिल कर ली। बचत भवन में हुए चुनाव में बीजेपी समर्थित भूपेंद्र सिंह सिसोदिया अध्यक्ष और भारत सिंह कलान्टा उपाध्यक्ष चुने गए। शिमला जिला परिषद को अब तक कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
अध्यक्ष पद पर बीजेपी को मिली निर्णायक बढ़त
अध्यक्ष पद के चुनाव में भूपेंद्र सिंह सिसोदिया को 13 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के सुरेंद्र रेटका को 10 मत हासिल हुए। चुनाव में दो वोट रद्द कर दिए गए। इस जीत के साथ बीजेपी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया। वहीं उपाध्यक्ष पद पर भी बीजेपी ने बाजी मारी। भारत सिंह कलान्टा को 14 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी को 10 मत मिले और एक वोट निरस्त हुआ।
दो निर्दलीयों ने बदला पूरा खेल
25 सदस्यों वाली शिमला जिला परिषद में बीजेपी और कांग्रेस किसी के पास भी अपने दम पर बहुमत नहीं था। बीजेपी के खाते में 11 सीटें, जबकि कांग्रेस के पास 10 सीटें थीं। अध्यक्ष पद जीतने के लिए 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी था। ऐसे में दो निर्दलीय सदस्य बेहद अहम हो गए थे। बीजेपी पहले ही दोनों निर्दलीय सदस्यों के समर्थन का दावा कर चुकी थी। चुनाव परिणाम ने साफ कर दिया कि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
कांग्रेस सरकार के लिए क्यों बड़ा झटका?
शिमला जिला परिषद में बीजेपी की यह जीत इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और शिमला जिले के 8 में से 7 विधायक कांग्रेस के हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार में शिमला जिले से तीन कैबिनेट मंत्री भी शामिल हैं। इसके बावजूद जिला परिषद के दोनों प्रमुख पद बीजेपी के खाते में जाना कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। जीत के बाद बीजेपी समर्थकों ने जश्न मनाया, जबकि कांग्रेस के लिए यह नतीजा संगठन और स्थानीय राजनीति के लिहाज से चुनौती बढ़ाने वाला है।
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