मेरठ के थापर नगर मिशन कंपाउंड में रहने वाले राजा सलूजा और उनकी पत्नी ईशा ने शादी की पहली सालगिरह को यादगार बनाने के लिए विदेश यात्रा का प्लान किया था। 21 फरवरी को यह कपल दुबई पहुंचा, जहां उन्होंने घूमने-फिरने और सुकून के कुछ खास पल बिताए। परिवार को उम्मीद थी कि शनिवार को दोनों दिल्ली लौट आएंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अचानक मध्य-पूर्व में हालात बिगड़ गए और युद्ध की आहट ने इस खुशहाल यात्रा को डर और अनिश्चितता में बदल दिया। जंग के हालात ऐसे बने कि उनकी वापसी की फ्लाइट रद्द कर दी गई और दोनों दुबई में ही फंस गए।
युद्ध की आंच और रद्द होती फ्लाइट्स
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने अब खुले युद्ध का रूप ले लिया है। ईरान की ओर से किए जा रहे हमलों का असर कुवैत, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन जैसे देशों में भी दिखने लगा है। दुबई और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राजा सलूजा की बहन दीपाली ने फोन पर बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि अचानक सभी फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गईं। एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों को वापस होटलों में भेज दिया गया। राजा ने बताया कि मिसाइलों की आवाजें सुनाई दे रही हैं और अबू धाबी जैसे शहरों में भी धमाकों की खबरें आ रही हैं। इस हालात ने वहां मौजूद हर भारतीय परिवार को चिंता में डाल दिया है।
होटल में सुरक्षित, लेकिन दिलों में डर
राजा और ईशा फिलहाल होटल में सुरक्षित हैं। संयुक्त अरब अमीरात की सरकार और स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों की मदद के लिए इंतजाम किए हैं। होटल स्टाफ यात्रियों को बाहर न निकलने की सलाह दे रहा है और हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, मिसाइल अलर्ट और सायरन की खबरें माहौल को तनावपूर्ण बना रही हैं। मेरठ में रह रहे उनके परिवार का कहना है कि राहत की बात यह है कि दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन कब तक वहां रहना पड़ेगा, यह साफ नहीं है। हर फोन कॉल पर परिवार की धड़कनें तेज हो जाती हैं और हर नई खबर चिंता बढ़ा देती है।
मेरठ में परिवार दहशत में, लौटने की आस
राजा सलूजा मेरठ में ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाते हैं और एक साधारण कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बहन दीपाली ने बताया कि पहले फ्लाइट के लिए इंतजार करने को कहा गया, लेकिन बाद में उसे पूरी तरह रद्द कर दिया गया। अब अगली फ्लाइट कब मिलेगी, इसकी कोई जानकारी नहीं है। मेरठ के कई और लोग भी इस समय खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं, जिनके परिवार यहां बेचैन हैं। युद्ध की यह स्थिति कब शांत होगी, कोई नहीं जानता। परिवार बस यही दुआ कर रहा है कि हालात जल्द सुधरें और राजा-ईशा सुरक्षित अपने घर लौट सकें। पहली एनिवर्सरी की यह यात्रा उनके लिए जिंदगी भर न भूलने वाला अनुभव बन गई है—जहां खुशियों की जगह डर और इंतजार ने ले ली।
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