इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रयागराज की कलावती देवी ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उनकी 25 वर्षीय बेटी ‘कुमारी पूजा’ को अदालत के सामने पेश कराया जाए। मामले में कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने पूजा को अदालत में पेश किया। इसके बाद कोर्ट ने बेटी से उसकी इच्छा और परिस्थितियों को लेकर बातचीत की।
बेटी बोली- मैं अपनी मर्जी से दिल्ली में रह रही हूं
अदालत के सामने पूजा ने साफ कहा कि वह अपनी इच्छा से दिल्ली में रह रही है और उसे किसी तरह से बंधक बनाकर नहीं रखा गया है। उसने अपनी मां के साथ वापस जाने से भी इनकार कर दिया। पूजा ने आरोप लगाया कि माता-पिता के घर पर उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता था और उसके साथ मारपीट तथा गाली-गलौज भी होती थी। हालांकि, उसकी मां ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि वह अपनी बेटी को अपने साथ रखना चाहती हैं।
बालिग होने के बाद बेटी खुद तय कर सकती है कहां रहेगी
न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने 28 सितंबर को दिए आदेश में मामले पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कोई भी बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा के खिलाफ सिर्फ इस आधार पर किसी के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि सामने वाला उसका माता-पिता है। अदालत ने यह भी माना कि पूजा बालिग है और मानसिक रूप से फैसले लेने में सक्षम है।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया बड़ा संदेश
कोर्ट ने माना कि पूजा ने अपनी मां के साथ न रहने का फैसला अपनी इच्छा से लिया है। ऐसे में उसे उसकी पसंद के स्थान या व्यक्ति के साथ रहने की स्वतंत्रता है। अदालत ने किसी गैर-कानूनी हिरासत की स्थिति नहीं पाए जाने पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी। इस फैसले ने साफ कर दिया कि बालिग व्यक्ति के रहने और जीवन से जुड़े फैसलों में उसकी अपनी इच्छा को महत्व दिया जाएगा।
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