पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के अंतिम दिन सोमवार, 27 अप्रैल को हुगली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जोरदार जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सत्ताधारी Trinamool Congress और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर तीखा हमला बोला। योगी ने दावा किया कि राज्य में जनता बदलाव के मूड में है और पहले चरण के मतदान के बाद ही टीएमसी के कार्यकर्ताओं में डर साफ नजर आने लगा है। उन्होंने अपने भाषण में बार-बार “जय श्रीराम” के नारे का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि आस्था और पहचान का प्रतीक बन चुका है।
‘राम नाम’ बनाम ‘राजनीति’ पर बयान
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश में आज “राम नाम” और “हर हर महादेव” की गूंज सुनाई देती है, जबकि पश्चिम बंगाल में हालात इसके उलट बताए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दबाने की कोशिश हो रही है। योगी ने कहा कि “जय श्रीराम” के नारे से कुछ लोगों को परेशानी होती है, लेकिन यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने यूपी में कानून व्यवस्था को मजबूत किया है और 2017 से पहले जो हालात थे, अब उनमें पूरी तरह बदलाव आ चुका है।
कानून व्यवस्था और ‘जिहाद’ पर आरोप
सीएम योगी ने अपने भाषण में कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए टीएमसी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अपराध और अराजकता बढ़ी है और टीएमसी के कार्यकर्ता खुलेआम दबंगई कर रहे हैं। योगी ने “लव जिहाद” और “लैंड जिहाद” जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सड़कों पर नमाज की अनुमति दी जाती है, जबकि दुर्गा विसर्जन जैसे धार्मिक आयोजनों पर पाबंदी लगाई जाती है, जो भेदभाव को दर्शाता है।
चुनावी माहौल में बढ़ी बयानबाजी
हुगली की इस रैली के साथ ही पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार का शोर थम गया, लेकिन नेताओं के तीखे बयान अब भी चर्चा में बने हुए हैं। योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि बंगाल में एससी-एसटी समाज भी अब बदलाव चाहता है और टीएमसी के खिलाफ खड़ा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य की तस्वीर बदल जाएगी। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आखिरी दिन इस तरह के बयान चुनावी माहौल को और ज्यादा गर्म कर देते हैं और मतदाताओं पर असर डालने की कोशिश होती है।








