महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद Sanjay Raut ने एक ऐसा दावा किया है जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान राउत ने कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें ऐसी तस्वीरें भेजी हैं, जिनमें अभिजीत दीपके और प्रधानमंत्री के बीच अमेरिका में मुलाकात होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह इस मामले में कोई सीधा आरोप नहीं लगा रहे हैं और फिलहाल उन्हें मिली जानकारी की सत्यता की जांच कर रहे हैं। राउत ने कहा कि लोगों द्वारा भेजी गई सूचनाओं के आधार पर वह पूरे मामले की जानकारी जुटा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्ष तथा सत्तापक्ष के समर्थकों के बीच इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि अब तक इस कथित मुलाकात से जुड़ा कोई आधिकारिक प्रमाण या पुष्टि सामने नहीं आई है।
कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर भी साधा निशाना
संजय राउत ने अपने बयान के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों से महाराष्ट्र की राजनीति पर कोई बड़ा असर पड़ने वाला नहीं है क्योंकि राज्य के राजनीतिक दल अपने मुद्दों पर लड़ने और जनता के बीच जाने में सक्षम हैं। राउत ने यह भी कहा कि देश में कई गंभीर मुद्दे मौजूद हैं जिन पर विपक्ष लगातार आवाज उठा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में प्रदर्शन किए और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल उठाए। राउत का कहना था कि राजनीतिक दलों को जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार केवल प्रतीकात्मक आंदोलनों या विवाद पैदा करने से जनहित के सवालों का समाधान नहीं हो सकता। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए और विपक्ष की भूमिका को लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया।
पीएम मोदी के 12 साल पूरे होने पर नेहरू का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री Narendra Modi के केंद्र की सत्ता में 12 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में भी संजय राउत ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री का लंबा कार्यकाल लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है, लेकिन इसके आधार पर देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता। राउत ने कहा कि नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे और उन्होंने देश निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार नेहरू के कार्यकाल और योगदान की तुलना करना आसान नहीं है। राउत ने दावा किया कि नेहरू ने लंबे समय तक देश का नेतृत्व किया और उनकी विरासत भारतीय लोकतंत्र की नींव से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय तथ्यों के आधार पर समझने की जरूरत है। राउत के इस बयान को भाजपा और विपक्ष के बीच चल रही वैचारिक बहस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
चुनाव, सरदार पटेल और आंबेडकर को लेकर भी उठाए सवाल
अपने बयान के अंतिम हिस्से में संजय राउत ने देश की चुनावी प्रक्रिया और ऐतिहासिक नेताओं के योगदान को लेकर भी कई टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि देश के पहले गृह मंत्री Vallabhbhai Patel और पहले कानून मंत्री B. R. Ambedkar के योगदान को हमेशा सम्मान मिलना चाहिए। राउत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास की चुनिंदा व्याख्या की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने 2019 के बाद हुए चुनावों को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार चिंताएं व्यक्त करता रहा है। हालांकि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार समय-समय पर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर अपना पक्ष रख चुके हैं। राउत के इन बयानों ने महाराष्ट्र सहित राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि अमेरिका में कथित मुलाकात को लेकर किए गए उनके दावे पर आगे कोई ठोस जानकारी सामने आती है या नहीं।








