पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। इसी बीच राज्य में बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां विधानसभा का कार्यकाल पूरा होते ही सदन स्वतः भंग हो गया। संविधान के अनुच्छेद 172 के तहत जैसे ही तय अवधि समाप्त हुई, विधानसभा का अस्तित्व खत्म हो गया और अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं और राज्यपाल की भूमिका अब बेहद अहम हो गई है।
हार के बावजूद इस्तीफे से इनकार
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ममता बनर्जी ने चुनावी नतीजों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और चुनाव परिणामों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करतीं। उनका आरोप है कि उन्हें हराया नहीं गया, बल्कि हराने की कोशिश की गई है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल अपने रुख पर कायम है।
भाजपा की ऐतिहासिक जीत
चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल करते हुए 294 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस परिणाम के बाद पार्टी अब सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार, नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जा सकता है। राज्यपाल जल्द ही बहुमत प्राप्त दल को सरकार गठन के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। यह जीत राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।
आगे क्या? नजरें राज्यपाल के फैसले पर
विधानसभा भंग होने और चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगला कदम क्या होगा। राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज है और हालात संवेदनशील बने हुए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे। फिलहाल सभी की नजर राज्यपाल के अगले फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि नई सरकार कब और कैसे शपथ लेगी। आने वाले दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
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