VIDEO: 6 वीडियो अपलोड करते ही मच गया हड़कंप! ‘घूसखोरी’ का आरोप लगाने वाला सिपाही सस्पेंड, 12 पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस विभाग उस समय चर्चा के केंद्र में आ गया जब पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सुनील शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक छह वीडियो अपलोड कर दिए। इन वीडियो में उन्होंने पुलिस विभाग के भीतर ड्यूटी लगाने के नाम पर कथित वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। वीडियो सामने आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सिपाही ने दावा किया कि ड्यूटी लगाने के लिए जवानों से 2 हजार रुपये तक लिए जाते हैं और यह पैसा एक “चैन सिस्टम” के जरिए ऊपर तक पहुंचता है। वीडियो में उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधा और तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। यही वजह रही कि मामला तेजी से वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। कई लोगों ने वीडियो को पुलिस व्यवस्था पर बड़ा सवाल बताया, जबकि विभाग ने इसे अनुशासनहीनता माना। अब इस मामले ने यूपी पुलिस के अंदरूनी सिस्टम और सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

सिपाही सुनील शुक्ला सस्पेंड, विभाग ने गाइडलाइन उल्लंघन बताया

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सिपाही सुनील शुक्ला को निलंबित कर दिया। विभाग का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पॉलिसी और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) की ओर से जारी सोशल मीडिया गाइडलाइंस का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कहा कि किसी भी पुलिसकर्मी को विभागीय मामलों को इस तरह सार्वजनिक मंच पर रखने की अनुमति नहीं है। विभाग के मुताबिक, वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा और अधिकारियों पर लगाए गए आरोप पुलिस सेवा की मर्यादा के खिलाफ हैं। हालांकि दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि अगर आरोप गंभीर थे तो उनकी जांच पहले क्यों नहीं हुई। सुनील शुक्ला के वीडियो ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। बताया जा रहा है कि पिछले दो हफ्तों में उन्होंने लगातार छह वीडियो अपलोड किए थे, जिनमें उन्होंने भ्रष्टाचार, ड्यूटी सिस्टम और कथित मानसिक प्रताड़ना जैसे मुद्दे उठाए थे।

जांच के आदेश के बाद 12 पुलिसकर्मी हटाए गए

मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस अधिकारियों ने विभागीय जांच के आदेश दे दिए। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए गणना कार्यालय यानी ड्यूटी आवंटन शाखा से एक दारोगा समेत 12 पुलिसकर्मियों को हटा दिया गया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि अब ड्यूटी आवंटन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम लागू करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, ताकि किसी तरह की मनमानी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो सके। सूत्रों के मुताबिक, वीडियो में लगाए गए आरोपों की आंतरिक स्तर पर जांच की जा रही है और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। कई पुलिसकर्मी इस पूरे मामले को लेकर खुलकर कुछ बोलने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरखाने में यह मुद्दा चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।

वायरल वीडियो ने पुलिस सिस्टम और अनुशासन पर छेड़ी नई बहस

सिपाही सुनील शुक्ला के वीडियो सामने आने के बाद अब यह मामला सिर्फ अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और अंदरूनी सिस्टम को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ विभाग सोशल मीडिया पर बयानबाजी को नियमों के खिलाफ बता रहा है, तो दूसरी ओर लोग यह पूछ रहे हैं कि अगर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे तो उनकी सच्चाई सामने लाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। कई लोगों का मानना है कि पुलिस विभाग में शिकायतों के समाधान के लिए मजबूत और भरोसेमंद व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों को सोशल मीडिया का सहारा न लेना पड़े। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया अब सरकारी विभागों के अंदर की बातों को सार्वजनिक करने का बड़ा माध्यम बन चुका है। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और आगे इस मामले में और कार्रवाई हो सकती है। लेकिन इतना तय है कि सिपाही के वायरल वीडियो ने यूपी पुलिस के कामकाज, अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है।

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