‘क्या सच में पीयूष गोयल ने दिया था विवादित बयान?’ वायरल वीडियो पर मंत्री का बड़ा दावा, क्यों दर्ज कराई FIR?

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिखाई और सुनाई जा रही बातें पूरी तरह फर्जी हैं और उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया है। मंत्री के अनुसार, संसद परिसर के बाहर मीडिया से हुई उनकी वास्तविक बातचीत के कुछ हिस्सों को एडिट कर डीपफेक तकनीक के जरिए नया वीडियो बनाया गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति की छवि खराब करने की कोशिश नहीं है, बल्कि गलत जानकारी फैलाने का गंभीर मामला भी है। इसी वजह से उन्होंने पूरे मामले को कानून के हवाले कर दिया है।

चाणक्यपुरी थाने में FIR दर्ज, कार्रवाई की मांग

पीयूष गोयल ने बताया कि इस मामले में नई दिल्ली के चाणक्यपुरी पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके अनुसार, 25 जुलाई 2026 को इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई है और अब पुलिस जांच शुरू कर चुकी है। मंत्री ने कहा कि जो भी व्यक्ति इस कथित फर्जी वीडियो को बनाने, संपादित करने, साझा करने या जानबूझकर फैलाने में शामिल होगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत सामग्री फैलाने वालों को यह समझना होगा कि ऐसी गतिविधियां कानूनी जांच के दायरे में आती हैं और इनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

 AI के गलत इस्तेमाल पर जताई चिंता

केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग समाज के हित में होना चाहिए, न कि किसी को बदनाम करने या झूठी जानकारी फैलाने के लिए। उन्होंने कहा कि डीपफेक जैसी तकनीक का गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल लोकतांत्रिक संवाद और जनविश्वास दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी वीडियो या दावे पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी संवेदनशील जानकारी को सच मानने से पहले आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से उसकी पुष्टि जरूर करें। उन्होंने विश्वास जताया कि देश के जागरूक नागरिक, विशेष रूप से युवा, ऐसी भ्रामक सामग्री को पहचानेंगे और बिना जांचे-परखे उसे आगे साझा नहीं करेंगे।

 जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

वायरल वीडियो को लेकर अब जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल करेंगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि वीडियो किसने तैयार किया, उसे सबसे पहले किस प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया और उसके प्रसार में किन लोगों की भूमिका रही। हाल के वर्षों में डीपफेक तकनीक के जरिए फर्जी वीडियो और ऑडियो तैयार करने के मामले बढ़े हैं, जिसके कारण डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध को लेकर चिंता भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI का उपयोग जितना तेज़ी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त निगरानी और कानूनी कार्रवाई की जरूरत भी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।

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