महाराष्ट्र की राजनीति पल-पल अपना रंग बदल रही है और इसी बीच मुंबई स्थित उद्धव ठाकरे के आवास ‘मातोश्री’ से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने पूरे सूबे के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अचानक अपने सभी सांसदों की एक बेहद अहम और गुप्त बैठक बुलाई है। इस बैठक की भनक लगते ही पूरे महाराष्ट्र में कयासों का दौर शुरू हो गया है कि राज्य में कुछ बहुत बड़ा होने वाला है। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि यह बैठक सिर्फ एक रूटीन मुलाकात नहीं है, बल्कि इसके पीछे भविष्य की किसी बड़ी रणनीति या फिर किसी संभावित राजनीतिक उलटफेर की पटकथा लिखी जा रही है। हर कोई यह जानने को बेताब है कि बंद कमरे में उद्धव ठाकरे अपने करीबियों के साथ क्या योजना बना रहे हैं।
दो सांसदों की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चिंता, अंदरखाने क्या चल रहा है?
इस महाबैठक के बीच सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात सांसदों की उपस्थिति को लेकर रही। सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के मुताबिक, बैठक में पार्टी के अधिकांश सांसद तो समय पर पहुंच गए, लेकिन दो सांसदों की गैरमौजूदगी ने अचानक से सस्पेंस को कई गुना बढ़ा दिया है। हालांकि, स्थिति को संभालते हुए पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने साफ किया है कि हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर शारीरिक रूप से ‘मातोश्री’ नहीं पहुंच पाए, लेकिन वे ऑनलाइन माध्यम से इस पूरी बैठक में शुरू से अंत तक जुड़े रहे। इसके बावजूद, जो सांसद इस बैठक से पूरी तरह नदारद रहे, उन्हें लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्या यह केवल व्यक्तिगत व्यस्तता है या फिर परदे के पीछे कोई नया असंतोष पनप रहा है, इस सवाल ने उद्धव गुट की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
आगामी चुनाव और संगठन की मजबूती पर महामंथन
माना जा रहा है कि इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर है। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही उद्धव गुट बेहद आक्रामक नजर आ रहा है और वे राज्य में अपनी खोई हुई जमीन को पूरी तरह वापस पाने के लिए जी-जान से जुट गए हैं। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने सभी सांसदों से उनके क्षेत्रों का जमीनी फीडबैक लिया है। इसके साथ ही, महाविकास अघाड़ी (MVA) के सहयोगी दलों के साथ आगे की रणनीति कैसे तय की जाए और पार्टी के काडर को जमीनी स्तर पर कैसे और मजबूत किया जाए, इस पर विस्तार से चर्चा हुई है। उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे जनता के बीच जाएं और पार्टी की नीतियों को आक्रामक तरीके से रखें।
क्या महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाला है कोई नया मोड़?
शिवसेना में हुए ऐतिहासिक विभाजन के बाद से उद्धव ठाकरे फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। ऐसे में ‘मातोश्री’ पर होने वाली हर हलचल का सीधा असर राज्य की सत्ता और विपक्ष, दोनों पर पड़ता है। इस बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि उद्धव गुट आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा धमाका करने की तैयारी में है। दो सांसदों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन विरोधी खेमा इस मौके को भुनाने की ताक में बैठा है। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ‘मातोश्री’ की इस बंद कमरे की बैठक से जो रणनीति निकलकर सामने आती है, वह महाराष्ट्र की सियासत को किस दिशा में मोड़ती है और उद्धव ठाकरे अपने विरोधियों को क्या नया झटका देते हैं।








