संसद के मानसून सत्र के अब केवल दो सप्ताह बाकी हैं और कुल 10 बैठकें होनी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक इस सत्र में पेश करेगी? फिलहाल सरकार ने इस मुद्दे पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। संसद के गलियारों में भी इस विधेयक को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष लगातार सरकार की रणनीति पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार किसी भी बड़े कदम से पहले संसद के माहौल और समर्थन के आंकड़ों का पूरा आकलन करना चाहती है। इसलिए फिलहाल सरकार ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार और स्थिति देखने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
हंगामे और बदलते राजनीतिक समीकरण ने बढ़ाई मुश्किल
सत्र की शुरुआत में माना जा रहा था कि सरकार इस बार परिसीमन विधेयक ला सकती है। लेकिन बीच में छात्र आंदोलन, विपक्ष के विरोध और संसद में लगातार हंगामे ने राजनीतिक माहौल बदल दिया। शिक्षा से जुड़े मुद्दों और अन्य मामलों पर विपक्ष के आक्रामक रुख के कारण कई ऐसे दल भी सरकार से दूरी बनाते नजर आए, जिनके समर्थन की उम्मीद की जा रही थी। वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दल अब गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर भी सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। ऐसे हालात में सरकार किसी भी ऐसे विधेयक को लाने से बचना चाहती है, जिसमें विशेष बहुमत की जरूरत हो और पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित न हो।
दो-तिहाई बहुमत का गणित बना सबसे बड़ी चुनौती
संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। यानी सदन में पर्याप्त संख्या में सांसदों की मौजूदगी और मतदान में दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है। यही वजह है कि सरकार पहले अपने समर्थन का पूरा आंकड़ा देखना चाहती है। पिछले विशेष सत्र में एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं हो सका था, जिससे सरकार को राजनीतिक असहजता का सामना करना पड़ा था। अब सरकार ऐसी स्थिति दोबारा नहीं चाहती। इसी कारण वह पहले माहौल और संख्या बल का आकलन कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर सरकार को पूरा भरोसा हुआ तभी वह परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बड़े विधेयक सदन में पेश करेगी।
अगले कुछ दिन तय करेंगे सरकार की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस बीच अगले सप्ताह कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में लाने की तैयारी है। सरकार पहले इन विधेयकों पर विपक्ष का रुख और संसद का माहौल देखना चाहती है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि परिसीमन के जरिए भविष्य की चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है, जबकि सरकार इस पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रही है। अब सबकी नजर मानसून सत्र के बचे हुए दिनों पर है, क्योंकि इन्हीं बैठकों में तय होगा कि सरकार बड़ा राजनीतिक दांव खेलती है या इस फैसले को आगे के लिए टाल देती है।
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