उत्तर प्रदेश के Baghpat जिले के दोघट थाना क्षेत्र में एक 23 वर्षीय युवक की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। युवक की पहचान रोहित के रूप में हुई है, जिसे पूछताछ के लिए चौकी लाया गया था। जैसे ही उसकी मौत की खबर सामने आई, परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए और बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग को जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पुलिस की लापरवाही या गंभीर साजिश का नतीजा हो सकता है। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
परिजनों का आरोप—हत्या, पुलिस का दावा—आत्महत्या
इस मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिसने पूरे घटनाक्रम को और उलझा दिया है। परिजनों का आरोप है कि रोहित की मौत पुलिस पिटाई या यातना के कारण हुई है और इसे आत्महत्या बताकर मामला दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं पुलिस का कहना है कि युवक ने चौकी के कमरे में गमछे से फांसी लगाकर खुदकुशी की कोशिश की थी। पुलिस के अनुसार, उसे तुरंत नीचे उतारकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सच क्या है, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
लापरवाही पर कार्रवाई, तीन पुलिसकर्मी निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। जिले के पुलिस अधीक्षक Suraj Kumar Rai ने प्राथमिक जांच के बाद चौकी प्रभारी और दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही परिजनों की तहरीर के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।
जांच पर टिकी नजरें, उठे कई बड़े सवाल
यह घटना न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। पुलिस कस्टडी में मौत के मामलों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और यह मामला उन चिंताओं को फिर से सामने ले आया है। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
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