सिर पर पट्टी, हाथ में एडमिट कार्ड… फिर भी परीक्षा हॉल के बाहर रह गया छात्र, आखिर क्यों नहीं मिली एंट्री?

RE-NEET 2026 की परीक्षा लाखों छात्रों के लिए भविष्य तय करने वाला अहम पड़ाव थी। ऐसे में भोपाल के एक छात्र के साथ हुई घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के मुताबिक छात्र तय समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने के लिए घर से निकला था, लेकिन रास्ते में हुए एक सड़क हादसे ने उसकी सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया। दुर्घटना के बाद छात्र को चोट लगी, जिसके कारण उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाकर प्राथमिक उपचार कराना पड़ा। इलाज के दौरान उसके सिर पर पट्टी बांधी गई और कुछ जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में समय लग गया। इसके बावजूद छात्र और उसका परिवार समय बचाने की पूरी कोशिश करते हुए सीधे परीक्षा केंद्र पहुंचे।

 कुछ मिनट की देरी बनी सबसे बड़ी बाधा

छात्र के चाचा आमिर कादरी ने बताया कि वे अपने भतीजे को परीक्षा केंद्र लेकर जा रहे थे, तभी रास्ते में दुर्घटना हो गई। परिवार का कहना है कि हादसा पूरी तरह अप्रत्याशित था और देरी उनकी लापरवाही के कारण नहीं हुई। प्राथमिक उपचार के बाद वे तुरंत परीक्षा केंद्र पहुंचे, लेकिन निर्धारित समय सीमा पार होने की वजह से छात्र को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। परिवार ने परीक्षा केंद्र प्रशासन से मेडिकल इमरजेंसी को देखते हुए विशेष अनुमति देने की अपील की, लेकिन अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए प्रवेश देने से इनकार कर दिया। परीक्षा केंद्र के बाहर छात्र और परिजनों की निराशा साफ दिखाई दी।

क्या कहते हैं NTA के नियम?

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाओं में प्रवेश समय को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। एडमिट कार्ड और सूचना बुलेटिन में साफ तौर पर उल्लेख होता है कि निर्धारित समय के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना है। हालांकि, इस घटना के बाद कई अभिभावकों और छात्रों का कहना है कि मेडिकल इमरजेंसी जैसे मामलों के लिए अलग प्रावधान होना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि किसी छात्र की महीनों की मेहनत कुछ मिनटों की मजबूरी की भेंट न चढ़े।

 सोशल मीडिया पर उठे सवाल, राहत की मांग तेज

घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने परीक्षा नियमों को जरूरी बताया, वहीं कुछ लोगों ने असाधारण परिस्थितियों में लचीलापन बरतने की मांग की है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन आपातकालीन स्थितियों के लिए स्पष्ट नीति भी बनाई जानी चाहिए। फिलहाल छात्र और उसका परिवार संबंधित अधिकारियों से मामले में पुनर्विचार की मांग कर रहा है। यह घटना उन हजारों छात्रों और अभिभावकों के लिए भी एक संदेश है कि परीक्षा के दिन किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से बचने के लिए समय से काफी पहले घर से निकलना जरूरी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में कोई विशेष राहत मिल पाएगी या नहीं।

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