दुनिया की बड़ी टेक कंपनी Meta एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला उसके AI स्मार्ट ग्लासेस से जुड़ा है, जिसे यूजर्स की सुविधा और अनुभव बेहतर बनाने के लिए लॉन्च किया गया था। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन स्मार्ट चश्मों के जरिए रिकॉर्ड होने वाले वीडियो और तस्वीरों को AI सिस्टम को ट्रेन करने के लिए इंसानी कर्मचारियों द्वारा देखा जाता है। यही प्रक्रिया अब विवाद का कारण बन गई है, क्योंकि इसमें यूजर्स की निजी जिंदगी से जुड़े संवेदनशील पलों के भी सामने आने का दावा किया गया है।
कर्मचारियों का दावा: “निजी पलों तक पहुंच गया डेटा”
AI सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए काम करने वाले डेटा एनोटेटर्स ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ सामान्य वीडियो नहीं, बल्कि बेहद निजी और संवेदनशील कंटेंट भी देखने को मिला। कुछ कर्मचारियों ने दावा किया कि उन्होंने ऐसे वीडियो देखे, जिनमें लोग अपने घर के निजी पलों में थे। यहां तक कि कुछ मामलों में बेडरूम या निजी गतिविधियों से जुड़े वीडियो भी रिकॉर्ड हो गए थे। एक कर्मचारी के अनुसार, “हम लिविंग रूम से लेकर लोगों के बेहद निजी पलों तक सब कुछ देखते हैं।” इन दावों के सामने आने के बाद डेटा प्राइवेसी को लेकर बहस और तेज हो गई है।
हजारों कर्मचारियों की गई नौकरी
इस पूरे विवाद के बाद Meta ने अपने आउटसोर्सिंग पार्टनर Sama के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया। कंपनी का कहना था कि पार्टनर उनके तय मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। हालांकि Sama ने इस आरोप को नकारते हुए कहा कि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया था। इस फैसले का सबसे बड़ा असर कर्मचारियों पर पड़ा, क्योंकि करीब 1100 से ज्यादा लोगों की नौकरी चली गई। कुछ कर्मचारी संगठनों का दावा है कि यह कदम उन लोगों के खिलाफ उठाया गया, जिन्होंने अपने काम की सच्चाई को उजागर किया था। इससे कंपनियों की जिम्मेदारी और कर्मचारियों के अधिकारों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
Meta ने दी सफाई, अब आगे क्या?
यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है। यूके की डेटा निगरानी संस्था Information Commissioner’s Office ने इस पर चिंता जताई है और कंपनी से जवाब मांगा है। वहीं, केन्या की डेटा प्रोटेक्शन एजेंसी ने भी जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर Meta का कहना है कि AI सिस्टम को ट्रेन करने के लिए इस तरह की प्रक्रिया सामान्य है और इसमें यूजर्स की सहमति ली जाती है। कंपनी का दावा है कि डेटा का इस्तेमाल सीमित और सुरक्षित तरीके से किया जाता है। बावजूद इसके, इस खुलासे ने AI टेक्नोलॉजी, प्राइवेसी और वर्किंग कंडीशंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर जांच के नतीजों पर टिकी है, जो तय करेंगे कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी।
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