वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने साफ कहा कि ज्ञानवापी एक मस्जिद है और इसे लेकर किसी भी तरह की बयानबाजी से समाज में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
‘कयामत तक मस्जिद’ वाले बयान से बढ़ी तकरार
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में दो टूक कहा कि ज्ञानवापी हमेशा मस्जिद ही रहेगा। उन्होंने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के उस कथन पर आपत्ति जताई, जिसमें परिसर को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी। रजवी ने कहा कि इस तरह के बयान न केवल भड़काऊ हैं, बल्कि समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल को लेकर सार्वजनिक मंचों से ऐसी बातें करना उचित नहीं है, खासकर तब जब मामला संवेदनशील हो। उनके इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच विचारों की दूरी और स्पष्ट नजर आने लगी है।
अदालत में लंबित मामला, प्रक्रिया का सम्मान जरूरी
इस मुद्दे को लेकर सबसे अहम बात यह है कि ज्ञानवापी से जुड़ा मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में मौलाना रजवी ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब मामला कोर्ट में है, तब सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और कानून का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए, बजाय इसके कि सार्वजनिक मंचों पर विवाद को और बढ़ाया जाए। इस बयान ने न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और निष्पक्षता पर भी ध्यान खींचा है।
शरीयत का हवाला और आगे की स्थिति
मौलाना रजवी ने अपने पक्ष को मजबूत करते हुए इस्लामी कानून का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शरीयत में किसी भी धार्मिक स्थल को जबरन तोड़कर वहां मस्जिद बनाने की अनुमति नहीं है। उनके अनुसार, इस्लाम में मस्जिद केवल वैध और साफ जमीन पर ही बनाई जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस मुद्दे को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी न फैलाएं और शांति बनाए रखें। फिलहाल, इस बयानबाजी के बाद यह साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और चर्चा में बना रह सकता है, जबकि सभी की नजरें अब अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
Read More-“बातचीत से पहले ही ब्रेक…” ईरान के इनकार से अमेरिका की प्लानिंग पर पानी, आगे क्या होगा?








