Twisha Sharma Suicide Case: भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में गिरफ्तार की गईं रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। अदालत से न्यायिक हिरासत मिलने के बाद दोनों को भोपाल सेंट्रल जेल भेजा गया, लेकिन जेल पहुंचने के कुछ ही समय बाद एक नया विवाद सामने आ गया। आरोप है कि मां-बेटे को सामान्य कैदियों की तरह वार्ड में रखने के बजाय अस्पताल से जुड़े विशेष हिस्से में रखा गया। यह जानकारी सामने आते ही जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। मामले ने तूल पकड़ा तो जेल मुख्यालय को हस्तक्षेप करना पड़ा और पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए गए। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर इस हाई-प्रोफाइल मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अस्पताल वार्ड में रखने पर उठे सवाल, प्रशासन ने बदली व्यवस्था
जानकारी के अनुसार गिरिबाला सिंह को महिला जेल परिसर में मौजूद उस हिस्से में रखा गया था, जिसे आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं के लिए तैयार किया गया है। वहीं समर्थ सिंह को जेल के अस्पताल खंड में स्थान दिया गया था। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या उन्हें विशेष सुविधा दी जा रही है। बढ़ते विवाद और सवालों के बीच जेल प्रशासन ने तुरंत कदम उठाया और दोनों को सामान्य वार्ड में स्थानांतरित कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि व्यवस्था से जुड़े सभी तथ्यों की समीक्षा की गई है और पूरे मामले को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है। प्रशासन यह स्पष्ट करना चाहता है कि जेल नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया है और किसी को भी नियमों से अलग कोई विशेष लाभ नहीं दिया जाएगा।
जांच रिपोर्ट तैयार, लेकिन अभी नहीं हुई सार्वजनिक
मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल मुख्यालय ने वरिष्ठ अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच के दौरान यह देखा गया कि मां-बेटे को अस्पताल वार्ड में रखने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और क्या यह जेल नियमों के अनुरूप था। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। हालांकि अभी तक रिपोर्ट की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे मामले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। दूसरी ओर, ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले की जांच भी जारी है। जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, फोरेंसिक साक्ष्यों और अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अभी काम किया जाना बाकी है, इसलिए जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
अदालत में सुरक्षा को लेकर चिंता
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में भी तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। गिरिबाला सिंह ने अदालत के सामने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि न्यायिक सेवा में रहते हुए उन्होंने कई अपराधियों को सजा सुनाई थी और अब उन्हीं में से कुछ लोग उसी जेल में बंद हो सकते हैं, जिससे उन्हें खतरे की आशंका है। उन्होंने अपने बेटे की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा अदालत में यह आरोप भी लगाया गया कि समर्थ सिंह के साथ अदालत परिसर में मारपीट की घटना हुई थी और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, पीड़ित पक्ष के वकीलों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी पक्ष लगातार मामले का ध्यान मुख्य मुद्दे से भटकाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल अदालत और जांच एजेंसियों की निगाहें मामले के हर पहलू पर बनी हुई हैं। जेल के भीतर की व्यवस्थाओं से लेकर आत्महत्या मामले की जांच तक, हर घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और अदालत की अगली सुनवाई इस चर्चित मामले की दिशा तय कर सकती है।
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