PoJK का जिक्र करते हुए CM उमर अब्दुल्ला ने कही बड़ी बात, बोले- ‘1947 का फैसला…’

Independence Day 2026: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने परेड की सलामी ली और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया। अपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के इतिहास, 1947 के घटनाक्रम और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के मौजूदा हालात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि LoC के दूसरी तरफ की स्थिति को देखकर लगता है कि 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ रहने का फैसला सही था।

शहीदों को नमन कर शुरू हुआ स्वतंत्रता दिवस समारोह

स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के बलिदान स्तंभ पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वह बख्शी स्टेडियम पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड का निरीक्षण किया। कार्यक्रम में सुरक्षा बलों और विभिन्न विभागों की टुकड़ियों ने हिस्सा लिया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के उन लोगों को भी याद किया, जिन्होंने 1947 में हमलावरों का सामना किया था। उन्होंने कहा कि उस दौर में स्थानीय लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार जम्मू-कश्मीर की रक्षा के लिए संघर्ष किया था।

‘हमलावर खबरदार’ के नारे को किया याद

उमर अब्दुल्ला ने 1947 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कश्मीर में लोगों के बीच देश और अपनी जमीन की रक्षा करने का जज्बा था। उन्होंने उस दौर में लगाए जाने वाले ‘हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार’ नारे का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जिन लोगों के पास हथियार थे, उन्होंने उनका इस्तेमाल किया, जबकि दूसरे लोगों ने उपलब्ध साधनों के साथ हमलावरों का सामना किया। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई और उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इतिहास के उस दौर में लोगों ने जिस साहस का परिचय दिया, वह जम्मू-कश्मीर की कहानी का अहम हिस्सा है।

PoJK के हालात पर बोले उमर अब्दुल्ला

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि LoC के दूसरी तरफ सामने आने वाली घटनाओं को देखने के बाद उन्हें लगता है कि 1947 में भारत के साथ रहने का फैसला सही था। उन्होंने PoJK के लोगों को जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बताते हुए कहा कि वहां रहने वाले लोगों को भी वह अपना मानते हैं। उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PoJK के लिए सीटें आरक्षित हैं और उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में इन सीटों पर वहां के प्रतिनिधि बैठ सकेंगे। उन्होंने लोकतंत्र और संघीय व्यवस्था को देश की महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए इनके संरक्षण पर जोर दिया।

श्रीनगर में सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए श्रीनगर और कश्मीर के दूसरे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया था। बख्शी स्टेडियम और उसके आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। समारोह स्थल पर आने वाले लोगों और वाहनों की जांच के साथ आसपास के क्षेत्रों में निगरानी रखी गई। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में सुरक्षा व्यवस्था संभाली गई, ताकि स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम शांतिपूर्वक पूरा हो सके। मुख्यमंत्री के संबोधन में इतिहास, शहीदों के बलिदान, लोकतंत्र और PoJK का मुद्दा प्रमुख रहा। उनके बयान के बाद 1947 के फैसले और जम्मू-कश्मीर के मौजूदा राजनीतिक संदर्भ को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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