देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी सांसदों को राज्यसभा से नई पहचान मिल गई है। राज्यसभा सचिवालय ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए इन सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही उच्च सदन में राजनीतिक संतुलन में बदलाव देखने को मिला है। राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता अब भाजपा संसदीय दल का हिस्सा माने जाएंगे। इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं।
सरकार का पहला बयान
इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार की ओर से पहली प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने हमेशा मर्यादित और अनुशासित व्यवहार दिखाया है। साथ ही उन्होंने इन नेताओं का एनडीए में स्वागत करते हुए विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए ‘टुकड़े-टुकड़े’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है, क्योंकि इसे सीधे तौर पर विपक्ष पर निशाना माना जा रहा है।
Honb’le Chairman Rajya Sabha Shri C.P. Radhakrishnan Ji has accepted the merger of 7 AAP MPs with BJP. Now, Raghav Chadha ji, Sandeep Pathak ji, Ashok Mittal ji, Harbhajan Singh ji, Swati Maliwal ji, Rajinder Gupta ji & Vikramjit Singh Sahney ji are Members of BJP Parliamentary…
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) April 27, 2026
अयोग्यता की मांग हुई खारिज
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी इस फैसले से असहमत नजर आ रही है। पार्टी की ओर से राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। पार्टी का तर्क था कि ये सभी सांसद AAP के टिकट पर चुने गए थे और उनका पार्टी छोड़ना दल-बदल की श्रेणी में आता है। AAP ने इसे जनता के विश्वास के साथ धोखा बताते हुए कानूनी कदम उठाने की बात भी कही थी। हालांकि, राज्यसभा सचिवालय ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और साफ कर दिया कि सांसदों के भाजपा में शामिल होने को मान्यता दी जा चुकी है।
राज्यसभा में घटा आंकड़ा
इस फैसले के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई है। अब पार्टी के पास उच्च सदन में केवल तीन सांसद ही बचे हैं, जिनमें संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल शामिल हैं। वहीं भाजपा की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे उसे सदन में और मजबूती मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, यह मामला सियासी बहस का केंद्र बना हुआ है और सभी की नजरें आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं।
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