जिसके लिए घर-बार छोड़ा, उसी ने ले ली जान: शिवपुरी के होटल में प्रेमी ने किया प्रेमिका का कत्ल

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से शुरू हुई एक प्रेम कहानी का अंत इतना खौफनाक और रूह कँपा देने वाला होगा, इसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। देहात थाना क्षेत्र के पिपरसमा गांव के रहने वाले 21 वर्षीय रजनी धाकड़ और 25 वर्षीय संतोष जाटव के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों के सामाजिक और पारिवारिक हालात अलग थे, जिसके चलते उनके रिश्ते को समाज की मंजूरी मिलना नामुमकिन लग रहा था। इसी सामाजिक बंदिश के खौफ से तंग आकर दोनों ने सात जून की रात को चुपचाप अपने घरों को छोड़ दिया और हमेशा के लिए एक-दूसरे के होने का सपना लिए शहर से दूर भाग गए। अगली सुबह जब परिजनों को रजनी के अचानक गायब होने की भनक लगी, तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया। युवती के परिवार वालों ने तुरंत देहात थाने में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई और गांव के ही युवक संतोष जाटव पर उसे बहला-फुसलाकर ले जाने का गहरा संदेह जताया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन केस दर्ज कर लिया और आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और मुखबिरों के तंत्र को सक्रिय कर दोनों की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी।

मजदूरों की झोपड़ी से होटल के ऐशो-आराम तक: पुलिस की गिरफ्त में आया प्रेमी जोड़ा

तलाश में जुटी शिवपुरी पुलिस की तकनीकी टीम को जल्द ही एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी, जब दोनों की अंतिम लोकेशन सीधे गुजरात के राजकोट जिले में ट्रेस हुई। बिना वक्त गंवाए 10 जून को देहात थाने की एक विशेष टीम युवती के सगे भाई को साथ लेकर गुजरात के लिए रवाना हो गई। पुलिस ने राजकोट के औद्योगिक क्षेत्र सांपर में जाल बिछाया और 11 जून को एक बड़ी फैक्ट्री के बाहर बनी मजदूरों की कच्ची झोपड़ी से रजनी और संतोष को सकुशल बरामद कर लिया। दोनों वहां अपनी पहचान छिपाकर मजदूरी करने और एक नई जिंदगी की शुरुआत करने की जद्दोजहद में जुटे थे। बरामदगी के कानूनी कागजात तैयार करने के बाद पुलिस की टीम दोनों को लेकर वापस मध्य प्रदेश के शिवपुरी के लिए रवाना हो गई। एक लंबा सफर तय करने और भारी शारीरिक थकान होने के कारण, पुलिस टीम ने रात के समय यात्रा करना सुरक्षित नहीं समझा। उन्होंने गांधीनगर से आगे उदयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ‘होटल राइन इन पोर्ट’ में रात करीब 10 बजे रुकने का फैसला किया। होटल में पुलिसकर्मियों सहित सभी ने एक साथ रात 11 बजे खाना खाया और सुबह जल्दी निकलने की बात कहकर अपने-अपने कमरों में सोने चले गए, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह रात उनके जीवन की सबसे काली रात साबित होने वाली है।

रात एक बजे का वो खूनी सन्नाटा और कस्टडी के भीतर का वीभत्स हत्याकांड

रात के करीब एक बज रहे थे, जब पूरे होटल में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था। अचानक उस वीरान सन्नाटे को चीरती हुई कमरे से किसी के तड़पने और जोर-जोर्स से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। बगल के कमरे में ठहरे पुलिसकर्मी चौंककर उठे और जब तक वे कुछ समझ पाते या कमरे का दरवाजा तोड़कर भीतर दाखिल होते, तब तक संतोष जाटव ने एक बेहद धारदार हथियार से सोते समय रजनी धाकड़ का गला बेरहमी से रेत दिया था। खून की नदियां बह चुकी थीं और रजनी तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही थी। अपनी प्रेमिका को तड़पता देख आरोपी संतोष के सिर पर भी न जाने क्या भूत सवार हुआ कि उसने उसी खूनी हथियार से खुद के गले पर भी कई जानलेवा वार कर दिए ताकि वह भी खुदकुशी कर सके। कमरे के भीतर का नजारा देखकर पुलिसकर्मियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। चारों तरफ खून फैला हुआ था और दोनों लहूलुहान हालत में फर्श पर पड़े थे। पुलिस ने आनन-फानन में स्थानीय एम्बुलेंस को बुलाया और दोनों को तुरंत गांधीनगर के सिविल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने रजनी धाकड़ को मृत घोषित कर दिया, जबकि अत्यधिक खून बह जाने के कारण संतोष जाटव की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।

खाकी की सुरक्षा पर उठे संगीन सवाल: होटल के बंद कमरे में कैसे पहुंचा मौत का हथियार?

इस सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली वारदात ने न केवल दोनों प्रेमियों के परिवारों को कभी न भूलने वाला गहरा सदमा दिया है, बल्कि पुलिस अभिरक्षा (पुलिस कस्टडी) की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बहुत बड़े और गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले पर शिवपुरी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव मुले ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि देहात थाना पुलिस दोनों को गुजरात से बरामद कर शिवपुरी ला रही थी और इसी दौरान उन्होंने कमरे के अंदर आत्मघाती कदम उठाया, जिसमें युवती की दर्दनाक मौत हो गई। चूंकि यह पूरी खूनी घटना गुजरात पुलिस के अधिकार क्षेत्र में हुई है, इसलिए गांधीनगर जिले के चिलोड़ा थाना पुलिस ने इस संबंध में हत्या और आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर अपनी विस्तृत वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी है। लेकिन सबसे बड़ा और अनसुलझा रहस्य यह है कि पुलिस कस्टडी में होने के बावजूद आरोपी संतोष के पास वह घातक धारदार हथियार कहां से आया? क्या पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद उनकी ठीक से तलाशी नहीं ली थी, या फिर होटल के कमरे में ही पहले से कोई ऐसी वस्तु मौजूद थी जिसका इस्तेमाल इस खूनी खेल में किया गया? इन सभी सवालों के जवाब और इस वीभत्स हत्याकांड के पीछे की असली वजह अब दोनों राज्यों की पुलिस की संयुक्त जांच और आरोपी संतोष के होश में आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगी।

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