ICU में आग के बाद 4 घंटे से लापता मरीज… जमीन बेचकर इलाज कराने वाले परिजनों का दर्द बढ़ा

Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गुरुवार तड़के ICU वार्ड में अचानक लगी आग के बाद अस्पताल में धुआं तेजी से फैल गया, जिससे मरीजों और परिजनों के बीच अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि इस दर्दनाक हादसे में अब तक 4 मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई मरीजों को अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

परिजनों का दर्द: ‘जमीन बेचकर इलाज कराया, अब मरीज का कुछ पता नहीं’

हादसे के बाद अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों का दर्द और गुस्सा दोनों सामने आया। एक पीड़ित परिवार ने रोते हुए बताया कि उन्होंने मरीज के इलाज के लिए अपनी जमीन बेचकर करीब 3 लाख रुपये अस्पताल में जमा किए थे, लेकिन अब मरीज का कोई अता-पता नहीं है। परिजनों के अनुसार पिछले चार घंटे से वे लगातार अस्पताल और आसपास के अन्य अस्पतालों में मरीज को खोज रहे हैं, लेकिन कोई भी सही जानकारी नहीं दे रहा है। मरीज की पहचान बैजनंदन राय के रूप में हुई है, जो मनियारी थाना क्षेत्र के पकाही गांव के रहने वाले हैं।

 कई मरीज दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट

घटना के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया गया। अधिकारियों के अनुसार ICU में भर्ती कई गंभीर मरीजों को धुएं और आग के बीच से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। कुल मिलाकर 12 से अधिक मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मुजफ्फरपुर एसएसपी ने अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि की है और कहा है कि घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सभी मरीजों की पहचान और ट्रांसफर रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

निजी अस्पताल की लापरवाही या सिस्टम फेलियर?

इस घटना ने निजी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि आग लगने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे परिजनों में भ्रम और आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि ICU जैसे संवेदनशील वार्ड में फायर सेफ्टी सिस्टम और इलेक्ट्रिकल मॉनिटरिंग बेहद जरूरी होती है, जो संभवतः इस मामले में कमजोर साबित हुई। फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

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