मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती ने एक बार फिर एक आदिवासी परिवार की किस्मत चमका दी है। जिले के अहिरगवां क्षेत्र में खनन कर रहे एक परिवार को 11.19 कैरेट का उज्ज्वल (जेम्स क्वालिटी) हीरा मिला है, जिसकी शुरुआती अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई जा रही है। हीरा मिलने के बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। नियमानुसार इस हीरे को डायमंड कार्यालय में जमा करा दिया गया है, जहां इसकी जांच के बाद आगामी शासकीय नीलामी में इसे रखा जाएगा। नीलामी के बाद तय प्रक्रिया के अनुसार राशि परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी। इस सफलता ने एक बार फिर पन्ना को हीरों की धरती साबित कर दिया है।
दो महीने की मेहनत रंग लाई, दूसरी बार चमकी किस्मत
परिवार के सदस्य राकेश गौड़ ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष अप्रैल में पट्टा लेकर अपने भाइयों और रिश्तेदारों के साथ निजी जमीन पर हीरे की खोज का काम शुरू किया था। करीब दो महीने तक लगातार मेहनत करने के बाद उन्हें यह बेशकीमती हीरा मिला। खास बात यह है कि यह परिवार पहली बार नहीं, बल्कि दूसरी बार इतनी बड़ी सफलता हासिल कर रहा है। वर्ष 2024 में भी इसी परिवार को 19.22 कैरेट का हीरा मिला था, जिसकी सरकारी नीलामी में लगभग 93 लाख रुपये की कीमत मिली थी। उस समय मिली रकम के बाद भी परिवार ने खनन का काम नहीं छोड़ा और एक बार फिर उनकी मेहनत रंग लाई। लगातार दूसरी बार हीरा मिलने से पूरे इलाके में इस परिवार की चर्चा हो रही है।
बच्चों की पढ़ाई और नए खनन कार्य में लगाएंगे राशि
परिवार का कहना है कि इस बार मिलने वाली रकम का उपयोग सबसे पहले बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए किया जाएगा। इसके अलावा वे भविष्य में और खदानों का पट्टा लेकर हीरे की खोज का काम जारी रखना चाहते हैं। परिवार के अनुसार, खदान में कई लोगों की साझेदारी है, जिसमें भाइयों, रिश्तेदारों और जमीन मालिक का भी हिस्सा तय है। उनका मानना है कि मेहनत और धैर्य के साथ काम करने वालों को पन्ना की धरती कभी न कभी जरूर मौका देती है। फिलहाल परिवार उसी खदान में आगे भी खनन कर रहा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में और भी बहुमूल्य हीरे मिल सकते हैं।
पन्ना में ऐसे होती है हीरे की खोज, हर साल हजारों लोग आजमाते हैं किस्मत
पन्ना जिले में हीरे की तलाश के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग सरकारी नियमों के तहत खदानों का पट्टा लेकर खनन करते हैं। निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद सीमित क्षेत्र में खुदाई की अनुमति मिलती है। खनन के दौरान निकली मिट्टी और पत्थरों को पानी से धोकर अलग किया जाता है, फिर बारीकी से छानकर हीरे की तलाश की जाती है। यदि किसी को हीरा मिलता है तो उसे अनिवार्य रूप से डायमंड कार्यालय में जमा कराना होता है। इसके बाद विशेषज्ञ उसकी गुणवत्ता और कीमत का आकलन करते हैं तथा सरकारी नीलामी के माध्यम से उसकी बिक्री कराई जाती है। अधिकारियों के अनुसार, इस बार मिले 11.19 कैरेट के हीरे की वास्तविक कीमत जांच और नीलामी के बाद ही तय होगी। पन्ना की धरती से समय-समय पर ऐसे बहुमूल्य हीरे मिलने की घटनाएं लोगों को अपनी किस्मत आजमाने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।






