लखनऊ में मोहर्रम के मौके पर इस बार धार्मिक माहौल के साथ-साथ एक भावुक दृश्य भी देखने को मिला। अलीगंज कोचिंग सेंटर अग्निकांड में जान गंवाने वाले 15 लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी हाथों में मोमबत्तियां लेकर कार्यक्रम में पहुंचे और मृतकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस दौरान पूरा माहौल शांत और गंभीर रहा, जहां लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर हादसे में मारे गए लोगों को याद किया। कई लोगों की आंखें नम नजर आईं और मौके पर मौजूद हर व्यक्ति इस दर्दनाक घटना को याद कर भावुक हो उठा।
बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी, सामाजिक एकता का संदेश
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों की भी सक्रिय भागीदारी देखी गई। भीड़ में महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिन्होंने हाथों में मोमबत्तियां लेकर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
कार्यक्रम के दौरान लोगों ने यह संदेश दिया कि इस तरह की घटनाओं को केवल याद नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उनसे सीख लेकर भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने एकजुट होकर पीड़ित परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त की।
सपा नेता सुमैया राणा भी पहुंचीं, न्याय की मांग उठी
इस कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी की नेता सुमैया राणा भी शामिल हुईं। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और सरकार से अपील की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मौके पर मौजूद लोगों ने भी एक स्वर में मांग उठाई कि हादसे की जांच निष्पक्ष हो और जिनकी लापरवाही से यह घटना हुई, उन्हें कड़ी सजा दी जाए। लोगों ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना जरूरी है।
हादसे की यादें अब भी ताज़ा, उठ रहे सवाल
गौरतलब है कि 22 जून को लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं, जिनमें सुरक्षा व्यवस्था की कमी और इमारत के एक ही निकास द्वार का होना प्रमुख कारण बताया गया था।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा उपायों का पालन किया गया होता, तो इतने बड़े नुकसान को टाला जा सकता था। मोहर्रम के मौके पर हुई यह श्रद्धांजलि सभा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही की मांग का भी प्रतीक बन गई।








