उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व पर्यावरण दिवस के खास मौके पर अपने सरकारी आवास पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत की। उन्होंने अपने हाथों से आम का एक पौधा लगाया और प्रदेशवासियों को पर्यावरण दिवस की बधाई दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एक बहुत ही गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि अगर हमें अपनी प्रकृति और जीव सृष्टि को बचाना है, तो सबसे पहले पर्यावरण की रक्षा करनी होगी। सीएम योगी ने देश के हर नागरिक से अपील की कि वे अपनी मातृभूमि के प्रति ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं और धरती को हरा-भरा बनाने में अपना योगदान दें।
चुनौतियों को पार कर यूपी ने रचा इतिहास
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि साल 2017 में जब उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार बनी थी, तब वन महोत्सव के तहत 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। उस समय सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां थीं, क्योंकि न तो पर्याप्त नर्सरी थीं और न ही इतने बड़े स्तर पर काम करने का पुराना अनुभव। लेकिन वन विभाग और अन्य विभागों की कड़ी मेहनत से यह मुमकिन हो सका। सीएम योगी ने गर्व से बताया कि पिछले 9 वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे राज्य का फॉरेस्ट कवर (हरियाली) काफी तेजी से बढ़ा है।
ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए सरकार के कड़े कदम
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के प्रसिद्ध कथन ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ की याद दिलाते हुए कहा कि माता और मातृभूमि की सेवा ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है। आज के समय में पर्यावरण की रक्षा करना भी इसी सेवा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल पेड़ ही नहीं लगा रही, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग, क्लाइमेट चेंज और बदलते मौसम चक्र जैसी बड़ी समस्याओं से निपटने के लिए भी काम कर रही है। पूरे प्रदेश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने के लिए मिट्टी के बर्तनों (माटी कला) को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए कुम्हार समाज के लोगों को मुफ्त मिट्टी और सोलर-इलेक्ट्रिक चाक भी बांटे गए हैं।
आने वाली पीढ़ी के लिए सीएम योगी की बड़ी अपील
पर्यावरण के साथ-साथ पानी की बूंद-बूंद को बचाने के लिए भी उत्तर प्रदेश सरकार ने कई बेहतरीन मॉडल पेश किए हैं। सीएम योगी ने बताया कि अब शहरों में एक निश्चित आकार से बड़े आवासीय और व्यावसायिक भवनों के लिए ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ (वर्षा जल संचयन) को कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के जरिए भावुक अपील करते हुए कहा कि लोग न सिर्फ पौधे लगाएं, बल्कि अपनी मां की तरह ही उन पौधों की देखभाल और संरक्षण भी करें। इस खास मौके पर वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, केपी मलिक समेत शासन के कई बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे।
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