राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ सांसद Manoj Jha इन दिनों एक ऐसे विवाद को लेकर चर्चा में हैं, जिसने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक संगठन की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर एक सिफारिशी पत्र वायरल होने के बाद यह चर्चा शुरू हुई कि कहीं मनोज झा इस संगठन का समर्थन तो नहीं कर रहे हैं। पत्र में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। जैसे ही यह पत्र सार्वजनिक हुआ, कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं और विपक्षी दलों के साथ CJP के संभावित संबंधों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद मनोज झा ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उनका इस संगठन से किसी भी प्रकार का राजनीतिक या वैचारिक संबंध नहीं है।
मनोज झा बोले- केवल स्थान दिलाने में की थी मदद
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज झा ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने केवल एक पत्रकार के अनुरोध पर कार्यक्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी। उनके अनुसार, सौरभ दास नामक पत्रकार ने उनसे संपर्क किया था और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने में सहायता मांगी थी। झा ने बताया कि सांसद होने के नाते वे समय-समय पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और नागरिक समूहों की प्रशासनिक सहायता करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के अनुरोधों पर सिफारिशी पत्र देना कोई असामान्य बात नहीं है। झा ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस पत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उसमें कहीं भी कॉकरोच जनता पार्टी का नाम नहीं लिखा गया था। उनका कहना है कि केवल एक प्रशासनिक मदद को राजनीतिक समर्थन के रूप में पेश करना गलत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस आंदोलन से उनका नाम जोड़ा जा रहा है, उसकी विचारधारा और उद्देश्य से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
CJP ने भी समर्थन की अटकलों को किया खारिज
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने भी इस मामले में अपनी स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया में किसी सांसद की सिफारिश आवश्यक थी, इसलिए उन्होंने मनोज झा से संपर्क किया था। दास के मुताबिक, यह केवल औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा था और इसका किसी राजनीतिक समर्थन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि CJP एक स्वतंत्र मंच के रूप में काम कर रही है और उसे किसी राजनीतिक दल या नेता का समर्थन प्राप्त नहीं है। इस बयान के बाद यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई कि संगठन और RJD के बीच किसी प्रकार की राजनीतिक साझेदारी या गठजोड़ की खबरें निराधार हैं। बावजूद इसके, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है और कई लोग अब भी इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं।
प्रदर्शन की तैयारी के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब CJP ने 6 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। इसी कारण संगठन की गतिविधियों पर पहले से ही राजनीतिक नजरें टिकी हुई थीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके लिए जारी सिफारिशी पत्र ने मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी नए संगठन के साथ बड़े नेताओं का नाम जुड़ते ही अटकलें शुरू हो जाती हैं, खासकर तब जब मामला राष्ट्रीय राजनीति और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा हो। फिलहाल मनोज झा और CJP दोनों ने स्पष्ट शब्दों में किसी भी प्रकार के राजनीतिक संबंध या समर्थन की बात से इनकार किया है। इसके बावजूद आने वाले दिनों में होने वाले प्रदर्शन और संगठन की गतिविधियों पर राजनीतिक दलों की नजर बनी रह सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 6 जून के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है।








