चुनाव खत्म होते ही बढ़ गए पेट्रोल-डीजल के दाम! सचिन पायलट ने किया बड़ा दावा, बोले- ‘सब पहले से…’

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई ताजा बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Sachin Pilot ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव खत्म होने का इंतजार पहले से किया जा रहा था और वोटिंग पूरी होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए गए। सचिन पायलट ने कहा कि सरकार ने चुनाव के दौरान जनता को राहत दिखाने के लिए कीमतों को रोके रखा, लेकिन जैसे ही पांच राज्यों के चुनाव समाप्त हुए, आम लोगों पर महंगाई का नया बोझ डाल दिया गया। उनके इस बयान के बाद तेल की कीमतों का मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है। देश के कई हिस्सों में लोग पहले से ही महंगाई से परेशान हैं और अब ईंधन की बढ़ी कीमतों ने चिंता और बढ़ा दी है।

सचिन पायलट ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने कहा कि यह फैसला अचानक नहीं बल्कि पहले से तय रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी माहौल में जनता को नाराज नहीं करना चाहती थी, इसलिए कीमतों को स्थिर रखा गया। पायलट ने कहा, “पहले वोट लो और फिर दाम बढ़ाओ, यही नीति अपनाई गई है।” उन्होंने दावा किया कि जैसे ही चुनाव प्रक्रिया खत्म हुई, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ता है और उसके साथ रोजमर्रा की कई चीजें भी महंगी हो जाती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल पूछा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव पहले से था, तो चुनाव के दौरान कीमतें क्यों नहीं बढ़ाई गईं। पायलट के मुताबिक यह कदम पूरी तरह राजनीतिक समय को ध्यान में रखकर उठाया गया।

चार साल बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी पिछले चार वर्षों में पहली बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत में लगभग 3.25 रुपये प्रति लीटर और डीजल में करीब 3.02 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राजस्थान सहित कई राज्यों में पेट्रोल 107 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है, जबकि डीजल भी 93 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपये और डीजल करीब 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं मुंबई समेत दूसरे महानगरों में भी तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। इसके अलावा सीएनजी की कीमतों में भी दो रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी की गई है। उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा था, जिसके बाद कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया गया।

महंगाई और राजनीति दोनों पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल, सब्जी, दूध और रोजमर्रा की जरूरत की दूसरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई का असर और ज्यादा महसूस किया जा सकता है। दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल पहले ही ईंधन की कीमतों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक जोर पकड़ सकता है। वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण यह फैसला जरूरी हो गया था। हालांकि आम जनता फिलहाल बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्च को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित नजर आ रही है।

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