Dhar Bhojshala Case: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद पर इंदौर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा और बहुचर्चित फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि भोजशाला एक मंदिर है और यहां हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार प्राप्त है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद पर कोर्ट का फैसला सामने आते ही पूरे प्रदेश में इसकी चर्चा तेज हो गई। हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों, पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की रिपोर्ट और कानूनी पहलुओं के आधार पर यह माना जा सकता है कि भोजशाला परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और यह देवी सरस्वती का मंदिर था। अदालत ने यह भी माना कि पुरातत्व विज्ञान के जरिए मिले प्रमाणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फैसले के दौरान कोर्ट ने सभी वकीलों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने मामले को समझने में महत्वपूर्ण सहायता की। इस फैसले को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है।
कोर्ट ने दिए कई अहम निर्देश
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में भोजशाला परिसर को संरक्षित स्मारक बताते हुए कहा कि इसका संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग जारी रखेगा। अदालत ने सरकार और ASI को यह भी सुझाव दिया कि वहां संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था शुरू करने पर विचार किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने और उसे भोजशाला परिसर में स्थापित करने के विषय में केंद्र सरकार को विचार करने की सलाह दी। अदालत ने 2003 में जारी उस ASI आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को वहां नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मुस्लिम पक्ष चाहे तो सरकार से अलग मस्जिद के लिए जमीन आवंटित करने की मांग कर सकता है। अदालत ने साफ कहा कि मस्जिद ऐसी जगह बनाई जाए, जहां भविष्य में किसी तरह का विवाद पैदा न हो। कोर्ट के इस विस्तृत आदेश को भोजशाला विवाद में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
मुस्लिम पक्ष ने फैसले पर क्या कहा?
हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष की ओर से पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई है। शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन पहले आदेश की पूरी कॉपी पढ़ी और समझी जाएगी। उन्होंने साफ संकेत दिए कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। वकार सादिक ने कहा कि यह मामला केवल धार्मिक आस्था से नहीं बल्कि अधिकारों और ऐतिहासिक दावों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति कानूनी सलाह लेने के बाद तय की जाएगी। फैसले के बाद धार और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट मोड पर दिखाई दिया। संवेदनशील माहौल को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।
भोजशाला विवाद क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
धार की भोजशाला वर्षों से विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर और शिक्षा केंद्र मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। हर साल बसंत पंचमी और जुमे की नमाज के दौरान यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ती थी। इस विवाद को लेकर कई बार अदालतों में सुनवाई हुई और अलग-अलग आदेश भी जारी किए गए। अब हाई कोर्ट के ताजा फैसले ने इस पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और कानूनी रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाएगा। हालांकि, मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत के बाद यह साफ है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले समय में देश की सर्वोच्च अदालत में इस विवाद पर नई कानूनी बहस देखने को मिल सकती है।








