पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद आए दो बड़े एग्जिट पोल ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। Peoples Pulse और Janmat Poll दोनों ने तृणमूल कांग्रेस को स्पष्ट बढ़त दिखाई है। Peoples Pulse के अनुसार ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला TMC+ गठबंधन 177 से 187 सीटों तक पहुंच सकता है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी ऊपर है। वहीं Janmat Poll ने इससे भी बड़ा अनुमान जताते हुए टीएमसी को 195 से 205 सीटों तक पहुंचता दिखाया है। इन आंकड़ों ने साफ संकेत दिया है कि बंगाल में ममता बनर्जी की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है। अगर यह अनुमान सही साबित होते हैं तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बन सकती हैं। चुनाव नतीजों से पहले ही इन सर्वे ने बंगाल की सियासत को गर्मा दिया है।
बीजेपी को सीटें मिलेंगी, लेकिन सत्ता दूर नजर आ रही
एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी को भी अच्छी संख्या मिलती दिख रही है, लेकिन सरकार बनाने से काफी पीछे बताया गया है। Peoples Pulse के मुताबिक बीजेपी को 95 से 110 सीटें मिल सकती हैं, जबकि Janmat Poll ने 80 से 90 सीटों का अनुमान जताया है। इसका मतलब साफ है कि भाजपा बंगाल में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा सकती है, लेकिन सत्ता तक पहुंचने का रास्ता कठिन नजर आ रहा है। कांग्रेस को 1 से 3 सीटें और वाम दलों को 0 से 1 सीट मिलने का अनुमान है। एक समय बंगाल की राजनीति पर राज करने वाले लेफ्ट और कांग्रेस का लगातार कमजोर होना भी इस चुनाव की बड़ी कहानी माना जा रहा है। बीजेपी ने चुनाव में पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन एग्जिट पोल के आंकड़े उसके लिए उम्मीद से कम दिखाई दे रहे हैं।
रिकॉर्ड वोटिंग और महिलाओं का समर्थन बना बड़ा फैक्टर
इस बार पश्चिम बंगाल में 92 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया, जिसने चुनाव को बेहद खास बना दिया। भारी मतदान को लेकर सभी दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ज्यादा मतदान का असर ग्रामीण और महिला वोटरों में ज्यादा देखने को मिला। ममता सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं। इस योजना के तहत महिलाओं को सीधी आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसका असर चुनावी माहौल में दिखाई दिया। गांवों और छोटे शहरों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मतदान किया, जिसे टीएमसी के पक्ष में बड़ा संकेत माना जा रहा है। यही वजह है कि एग्जिट पोल में ममता बनर्जी की पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है।
ममता की छवि फिर बनी सबसे बड़ा हथियार
इस चुनाव में ममता बनर्जी ने खुद को एक जमीनी और संघर्षशील नेता के रूप में पेश किया। उन्होंने कई रोड शो किए, आम लोगों से मुलाकात की और खुद को “बंगाल की बेटी” के रूप में जनता के सामने रखा। यह रणनीति असरदार मानी जा रही है। बीजेपी ने भी आक्रामक प्रचार किया, लेकिन एग्जिट पोल के अनुसार ममता का स्थानीय चेहरा ज्यादा मजबूत साबित हुआ। बंगाल की जनता ने एक बार फिर क्षेत्रीय नेतृत्व पर भरोसा दिखाया है। हालांकि अंतिम फैसला मतगणना के दिन ही होगा, लेकिन अभी तक के रुझान बताते हैं कि बंगाल में फिर ममता मैजिक चल सकता है। अगर यही नतीजे आए तो ममता बनर्जी राज्य की राजनीति में नया इतिहास रच देंगी।







