तख्तापलट: 7 साल का साम्राज्य ध्वस्त! एक झटके में खत्म हुआ शम्मी सिल्वा का युग

भारत में आईपीएल 2026 की गूंज के बीच श्रीलंका क्रिकेट में बड़ा भूचाल आ गया है। लंबे समय से अध्यक्ष रहे शम्मी सिल्वा ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके साथ ही पूरी एग्जीक्यूटिव कमेटी भी भंग हो गई। यह फैसला ऐसे समय में आया जब देश में क्रिकेट प्रशासन को लेकर जनता का गुस्सा लगातार बढ़ रहा था। खराब प्रदर्शन, पारदर्शिता पर सवाल और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने बोर्ड को घेर रखा था। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के हस्तक्षेप के बाद यह सामूहिक इस्तीफा सामने आया, जिसे एक “सम्मानजनक एग्जिट” के तौर पर पेश किया गया।

बयान में क्या कहा गया और क्यों हुई पूरी कमेटी साफ

श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की गई कि अध्यक्ष शम्मी सिल्वा के साथ-साथ सभी प्रमुख पदाधिकारियों ने भी इस्तीफा दे दिया है। यह जानकारी राष्ट्रपति और खेल मंत्री को औपचारिक रूप से दे दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों से सरकार और बोर्ड के बीच लगातार बातचीत चल रही थी। जनता की मांग थी कि पूरे सिस्टम में बदलाव हो, क्योंकि टीम का प्रदर्शन लगातार गिरता जा रहा था। हाल ही में गैरी कर्स्टन को हेड कोच बनाने का फैसला भी आलोचनाओं को शांत नहीं कर सका, जिससे साफ हो गया कि केवल कोच बदलने से समस्या हल नहीं होगी।

7 साल का दबदबा कैसे हुआ खत्म?

शम्मी सिल्वा ने 2019 में पहली बार अध्यक्ष पद संभाला था और उसके बाद लगातार चार बार चुनाव जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। तीन बार वे निर्विरोध चुने गए, जिससे उनकी ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके कार्यकाल में श्रीलंका ने एशिया कप जरूर जीता, लेकिन बड़े ICC टूर्नामेंट्स में टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। 2023 वनडे वर्ल्ड कप में टीम 9वें स्थान पर रही, जबकि 2024 और 2026 टी20 वर्ल्ड कप में भी जल्दी बाहर हो गई। इन नतीजों ने जनता और पूर्व खिलाड़ियों को नाराज कर दिया, जिससे “सिल्वा हटाओ” अभियान तेज हो गया और आखिरकार उनका 7 साल का साम्राज्य ढह गया।

आगे क्या? ICC का खतरा और सरकार की अगली चाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बोर्ड की कमान कौन संभालेगा। नियमों के मुताबिक उपाध्यक्ष को जिम्मेदारी मिलनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में सरकार अंतरिम समिति बना सकती है, जिसमें पूर्व क्रिकेटरों और अनुभवी प्रशासकों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि यहां सबसे बड़ा खतरा ICC का है, जो क्रिकेट में सरकारी दखल को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करता। 2023 में भी इसी तरह के मामले में श्रीलंका पर प्रतिबंध लग चुका है। इस बार सरकार ने “बर्खास्तगी” के बजाय “स्वैच्छिक इस्तीफे” का रास्ता अपनाया है, ताकि ICC की कार्रवाई से बचा जा सके। अब सरकार के सामने चुनौती है कि वह सुधार भी करे और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन भी सुनिश्चित करे।

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