छह घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एसडीआरएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। इसके बाद नदी में एक लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। जानकारी के मुताबिक मगरमच्छ बच्ची को अपने जबड़े में दबाकर लगातार नदी में घूमता रहा, जिससे टीम के लिए उसे पकड़ना और बच्ची को छुड़ाना बेहद मुश्किल हो गया। करीब छह घंटे तक लगातार प्रयास करने के बाद एसडीआरएफ की टीम मगरमच्छ तक पहुंच पाई। काफी मशक्कत के बाद टीम ने बच्ची के शव को उसके जबड़े से बाहर निकाला। यह पूरा ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था और इसमें कई जवानों ने जोखिम उठाया।
बच्ची का आधा शरीर गायब
जब बच्ची को मगरमच्छ के चंगुल से बाहर निकाला गया, तो वहां मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर सन्न रह गए। मगरमच्छ बच्ची के शरीर के निचले हिस्से को खा चुका था, जिससे यह घटना और भी ज्यादा भयावह बन गई। पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिवार को सौंप दिया जाएगा। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और डर का माहौल है। लोग अपने बच्चों को नदी के पास जाने से रोक रहे हैं और प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
गांव में दहशत, प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद आसपास के गांवों में डर का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि चंबल नदी में मगरमच्छों की मौजूदगी पहले से है, लेकिन इस तरह की घटना ने उनकी चिंता को और बढ़ा दिया है। कई लोगों ने प्रशासन से नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है। वहीं अधिकारी लोगों को सतर्क रहने और बच्चों को अकेले नदी के पास न भेजने की सलाह दे रहे हैं। यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि प्राकृतिक जल स्रोतों के पास सावधानी कितनी जरूरी है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
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