कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान अब एक नए मोड़ पर आ गई है। कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने न केवल विपक्षी दलों के कान खड़े कर दिए हैं, बल्कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खेमे में भी बेचैनी पैदा कर दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे वापस अपनी मातृभूमि की कमान संभालने के लिए तैयार हैं?
जी. परमेश्वर का चौंकाने वाला बयान
गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए साफ तौर पर कहा कि अगर पार्टी आलाकमान मल्लिकार्जुन खरगे को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करता है, तो राज्य का हर नेता इसका स्वागत करेगा। परमेश्वर ने जोर देकर कहा, “खरगे जी हमारे सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में से एक हैं। अगर वे राज्य के मुख्यमंत्री बनते हैं, तो यह हमारे लिए बेहद गर्व और खुशी की बात होगी।” गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं आम हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
4 मई का ‘डेडलाइन’
कर्नाटक की सियासत में ‘4 मई’ की तारीख अब सस्पेंस का केंद्र बन गई है। दरअसल, इसी दिन चार राज्यों के विधानसभा चुनाव और कर्नाटक की दो सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे आने वाले हैं। चर्चा है कि इन नतीजों के तुरंत बाद कर्नाटक कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जी. परमेश्वर का यह बयान महज एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है जिसे हाईकमान चुपचाप तैयार कर रहा है। जब परमेश्वर से पूछा गया कि क्या खरगे खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, तो उन्होंने बड़ी चतुराई से गेंद हाईकमान के पाले में डाल दी, लेकिन खरगे के अनुभव की तारीफ करके कई दरवाजे खोल दिए।
कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती
कांग्रेस पार्टी के भीतर पिछले काफी समय से नेतृत्व को लेकर दो गुट आमने-सामने नजर आते रहे हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का प्रभाव है, तो दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं। ऐसे में मल्लिकार्जुन खरगे का नाम ‘प्लान-K’ के रूप में देखा जा रहा है, जो पार्टी के भीतर की गुटबाजी को खत्म करने का एकमात्र जरिया बन सकते हैं। खरगे कर्नाटक के जमीन से जुड़े नेता हैं और उनका कद इतना बड़ा है कि उनके नाम पर कोई भी गुट बगावत करने की हिम्मत नहीं करेगा। गृह मंत्री ने भी इशारा किया कि खरगे जैसे अनुभवी नेता के होने से राज्य के प्रशासन और राजनीति को एक नई दिशा मिलेगी।
क्या दिल्ली छोड़ बेंगलुरु आएंगे खरगे?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मल्लिकार्जुन खरगे अपनी राष्ट्रीय भूमिका को छोड़कर राज्य की राजनीति में वापस लौटेंगे? हालांकि जी. परमेश्वर ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बदलने को लेकर उनके पास कोई ‘ठोस सूचना’ नहीं है, लेकिन उनके शब्दों के बीच छिपे अर्थ कुछ और ही बयां कर रहे हैं। उन्होंने अंत में कहा कि अंतिम फैसला हाईकमान ही लेगा क्योंकि वे राज्य की जमीनी हकीकत से पूरी तरह वाकिफ हैं। अब देखना यह होगा कि 4 मई के बाद कर्नाटक की सत्ता में कोई बड़ा ‘पावर गेम’ देखने को मिलता है या फिर यह सिर्फ अटकलों का बाजार बनकर रह जाएगा।
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