90 के दशक में टीवी पर आने वाले कई शोज़ ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई, लेकिन एक ऐसा भी शो था जो अपनी कहानी से ज्यादा एक भयावह हादसे के लिए याद किया जाता है। ‘द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ उस दौर का बेहद लोकप्रिय ऐतिहासिक धारावाहिक था, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह शो 1990 से 1991 के बीच प्रसारित हुआ और करीब 60 एपिसोड तक चला। लेकिन इसकी असली पहचान उस दर्दनाक घटना से जुड़ी है जिसने पूरी टीवी इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया।
8 फरवरी 1989: जब सेट पर मच गया था मौत का तांडव
इस शो की शूटिंग के दौरान 8 फरवरी 1989 को मैसूर के एक स्टूडियो में भयानक आग लग गई। उस समय सेट पर कई लोग मौजूद थे और शूटिंग चल रही थी। अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया। लकड़ी और ज्वलनशील सामग्री से बने सेट ने आग को तेजी से फैलने में मदद की। धुएं और अफरा-तफरी के बीच लोग बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन कई लोग फंस गए। इस हादसे में करीब 52 लोगों की जान चली गई, जो उस समय टीवी इंडस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ा झटका था।
डायरेक्टर भी झुलसे, पूरी इंडस्ट्री सदमे में
इस हादसे में शो के निर्देशक और मुख्य अभिनेता संजय खान भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके शरीर का बड़ा हिस्सा जल गया था और उन्हें लंबे समय तक इलाज से गुजरना पड़ा। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं थी, बल्कि इसने इंडस्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमी को उजागर किया। इसके बाद सेट पर सुरक्षा को लेकर कई बड़े बदलाव किए गए और नियमों को सख्त बनाया गया।
आज भी क्यों याद किया जाता है ये शो
‘द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ को आज भी लोग सिर्फ एक टीवी शो के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी घटना के रूप में याद करते हैं जिसने कई परिवारों को हमेशा के लिए बदल दिया। यह हादसा एक कड़वी सीख बनकर सामने आया कि मनोरंजन के पीछे काम करने वाले लोगों की सुरक्षा कितनी जरूरी है। 36 साल बाद भी यह घटना लोगों के दिलों में जिंदा है और हर बार इसका जिक्र होते ही वो खौफनाक मंजर आंखों के सामने आ जाता है।
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