पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण भारत में एलपीजी को लेकर सरकार को कई अहम फैसले लेने पड़े हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि देश के कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एलपीजी गैस की सप्लाई रोक दी गई है और फिलहाल गैस केवल घरेलू उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। उनके अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर भारत में भी दिखाई दे रहा है।
केजरीवाल का आरोप— मोदी सरकार की नीतियां जिम्मेदार
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश के सामने खड़ा यह संकट सरकार की नीतियों का नतीजा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अपनी कुछ मजबूरियों के कारण प्रधानमंत्री अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुक रहे हैं और अब इसका असर देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। केजरीवाल ने कहा कि देशभर में स्कूलों और अस्पतालों जैसे जरूरी संस्थानों को छोड़कर अन्य कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को गैस की आपूर्ति रोक दी गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले दिनों में तेल और गैस की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है।
सरकार का कदम— घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
दूसरी ओर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति को संभालने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। मंत्रालय के अनुसार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही अतिरिक्त उत्पादन को खास तौर पर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित रखने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद आम नागरिकों के लिए खाना पकाने की गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन की इंटर-बुकिंग अवधि लागू की गई है। यानी एक बार सिलेंडर लेने के बाद अगली बुकिंग कम से कम 25 दिन बाद ही की जा सकेगी।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार की रणनीति
सरकार ने घरेलू गैस की आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) भी लागू कर दिया है। इसके तहत रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी का अधिकतम उत्पादन करने और उपलब्ध हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में घरेलू गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। हालांकि विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है, खासकर तब जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
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