“राष्ट्रपति का सम्मान, लेकिन चुप्पी क्यों?” संजय राउत ने मणिपुर हिंसा का जिक्र कर द्रौपदी मुर्मू पर उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति Droupadi Murmu के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। इसी मुद्दे पर Sanjay Raut ने केंद्र सरकार और राजनीतिक दलों पर सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद ने कहा कि राष्ट्रपति के सम्मान को राजनीति का मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं और इससे संवैधानिक पद को ही राजनीति में खींचा जा रहा है।

मणिपुर हिंसा का जिक्र कर उठाए सवाल

संजय राउत ने अपने बयान में कहा कि देश को गर्व है कि एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनी हैं, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान कई गंभीर घटनाएं भी हुई हैं। उन्होंने मणिपुर हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां आदिवासी महिलाओं के साथ अत्याचार की खबरें सामने आईं, लेकिन इस मुद्दे पर राष्ट्रपति की ओर से कोई बड़ी टिप्पणी नहीं आई। राउत ने यह भी कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों पर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं, मगर इन मामलों पर भी राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया कम देखने को मिली है।

“राष्ट्रपति का सम्मान जरूरी, लेकिन राजनीति से दूर रखें”

राउत ने साफ कहा कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और उनका सम्मान हर हाल में होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी राज्य में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान उस राज्य की सरकार को भी भरोसे में लेना चाहिए। पश्चिम बंगाल की राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने के लिए इस मुद्दे को उछाला जा रहा है। उनके मुताबिक राष्ट्रपति के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करना ही असल में उस पद का अपमान है।

लोकसभा स्पीकर और संसद के माहौल पर भी टिप्पणी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत ने संसद के कामकाज को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 2014 में Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से विपक्ष को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। राउत ने दावा किया कि संसद में कई बार विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं मिलता और माइक्रोफोन तक बंद कर दिए जाते हैं। साथ ही उन्होंने लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ताधारी दल को यह सोचना चाहिए कि ऐसी स्थिति आखिर क्यों पैदा हुई।

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