केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और CPI(M) के बीच हुए तीखे राजनीतिक टकराव के बाद यह सवाल उठ रहा था कि क्या वामपंथी पार्टी INDIA गठबंधन की अगली बैठक में हिस्सा लेगी। अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है। CPI(M) ने घोषणा की है कि वह 8 जून को होने वाली INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल होगी। पार्टी का कहना है कि चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों से उसे आपत्ति है, लेकिन भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता को बनाए रखना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ पार्टी ने बैठक में शामिल होने का फैसला किया है। CPI(M) की ओर से राज्यसभा सांसद और संसदीय दल के नेता जॉन ब्रिटास इस बैठक में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
कांग्रेस के चुनावी आरोपों पर जताई नाराजगी
बैठक में शामिल होने के फैसले के साथ ही CPI(M) ने कांग्रेस के रवैये पर अपनी नाराजगी भी खुलकर जाहिर की है। पार्टी के महासचिव एमए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने लगातार यह आरोप लगाया कि CPI(M) और भाजपा के बीच किसी तरह की समझ है। वामपंथी पार्टी का कहना है कि इस तरह के आरोपों ने विपक्षी दलों के बीच विश्वास को कमजोर किया है। एमए बेबी के अनुसार, चुनावी प्रचार में बार-बार ऐसे बयान दिए गए, जिससे गठबंधन की भावना को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इन आरोपों पर स्पष्टीकरण देने की भी मांग की है।
राहुल गांधी और अन्य नेताओं के बयानों पर भी सवाल
CPI(M) ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के कुछ बयानों पर भी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान कई बड़े नेताओं ने वाम दलों और भाजपा के बीच नजदीकी होने का दावा किया था। एमए बेबी ने कहा कि ऐसे बयान विपक्षी एकता को मजबूत करने के बजाय कमजोर करते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विपक्षी दलों के नेता यदि एक-दूसरे के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की मांग करें, तो इससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है। CPI(M) का मानना है कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले दलों को आपसी मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे पर ऐसे आरोप लगाने से बचना चाहिए। पार्टी ने कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन गठबंधन की राजनीति में संवाद और विश्वास भी जरूरी है।
मतभेद बरकरार, लेकिन विपक्षी एकता पर जोर
हालांकि कांग्रेस और CPI(M) के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, लेकिन वामपंथी पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह विपक्षी एकता को कमजोर नहीं होने देगी। पार्टी का कहना है कि INDIA गठबंधन का गठन लोकतंत्र, संविधान और विपक्ष की आवाज को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था। इसलिए मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सभी विपक्षी दलों का साथ मिलकर काम करना जरूरी है। CPI(M) ने भरोसा दिलाया है कि वह संसद के अंदर और बाहर विपक्षी दलों के साथ मिलकर जनहित के मुद्दे उठाती रहेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैठक में शामिल होने का फैसला यह संकेत देता है कि विपक्षी दल अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर बड़े राजनीतिक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। अब सबकी नजर INDIA गठबंधन की बैठक और उसमें होने वाली चर्चाओं पर टिकी हुई है।
Read More-बांग्लादेश सीमा पर अब क्या होने वाला है? अमित शाह ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश






