इज़रायल दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दुनिया में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और इज़रायल लंबे समय से आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ साथ मिलकर खड़े रहे हैं और आगे भी यह साझेदारी जारी रहेगी। इज़रायल की धरती से दिया गया यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नीति को दोहराने के साथ-साथ क्षेत्रीय संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्दोष लोगों पर हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकती और ऐसे तत्वों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुटता जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत हर उस ताकत के खिलाफ खड़ा रहेगा जो शांति और मानवता को चुनौती देती है।
पश्चिम एशिया में शांति क्यों है भारत के लिए अहम?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति से भारत के सीधे हित जुड़े हैं। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं और भारत के ऊर्जा हित भी यहां से जुड़े हैं। इसलिए भारत शुरू से ही संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। उन्होंने गाजा क्षेत्र में शांति की कोशिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में जो भी सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, उनका समर्थन किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इज़रायली नेतृत्व के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और यह दोहराया कि भारत हर उस पहल का समर्थन करेगा जो स्थायी शांति और स्थिरता की ओर ले जाए।
रिश्तों को मिला ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा
इस दौरे के दौरान भारत और इज़रायल के संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा देने का फैसला किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी विश्वास और साझा हितों पर आधारित हैं। उन्होंने इज़रायल के प्रधानमंत्री **बेंजामिन नेतन्याहू** का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए आभार जताया और कहा कि इज़रायल आना उनके लिए गर्व और भावनात्मक अनुभव है। उन्होंने याद दिलाया कि नौ वर्ष पहले वे इज़रायल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे और यह दौरा उस ऐतिहासिक रिश्ते को और मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है। इज़रायली संसद द्वारा मिले सम्मान को भी उन्होंने भारत के 140 करोड़ लोगों के प्रति सम्मान बताया।
व्यापार, टेक्नोलॉजी और कृषि में सहयोग का विस्तार
प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देश व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। पिछले वर्ष हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के बाद अब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति हो रही है। टेक्नोलॉजी को साझेदारी का केंद्र बताते हुए उन्होंने कहा कि इज़रायल में भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI के इस्तेमाल को लेकर सहमति बनी है, जिससे दोनों देशों के कारोबारियों और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। रक्षा क्षेत्र में दशकों पुराने सहयोग को और मजबूत करने, ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी और संयुक्त उत्पादन पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में इज़रायल के सहयोग से भारत में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की संख्या 100 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। ‘विलेज ऑफ एक्सीलेंस’ कार्यक्रम के जरिए आधुनिक तकनीक गांवों तक पहुंचाई जाएगी, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सके। साथ ही इंडिया-इज़रायल इनोवेशन एग्रीकल्चर सेंटर और एकेडमिक फोरम की स्थापना की भी घोषणा की गई है।
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। इज़रायल की धरती से दिया गया उनका आतंकवाद पर सख्त संदेश अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्पष्ट नीति को दोहराता है और यह संकेत देता है कि भारत अपने हितों और वैश्विक शांति के मुद्दे पर किसी भी तरह की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है।








