संसद में ‘खामेनेई’ का नाम लेते ही गरमाई बहस, इकरा हसन ने 56 इंच वाले बयान पर कसा तंज

उत्तर प्रदेश की कैराना सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने मंगलवार को संसद में चल रही चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की विदेश नीति पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि देश की मौजूदा विदेश नीति स्पष्ट दिशा और साहस की कमी से जूझ रही है, जिसका असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है। इकरा हसन ने कहा कि सरकार बार-बार दावा करती है कि देश में जरूरी वस्तुओं का भंडार पर्याप्त है, लेकिन इसके बावजूद महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आपूर्ति मजबूत है तो फिर आम लोगों को महंगे पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर क्यों झेलने पड़ रहे हैं। सांसद ने कहा कि विदेश नीति केवल कूटनीतिक बयानबाजी से नहीं चलती, बल्कि इसमें ठोस निर्णय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत रुख की जरूरत होती है।

खामेनेई का जिक्र और ‘56 इंच’ पर तंज

अपने भाषण के दौरान इकरा हसन ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का जिक्र करते हुए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि असली नेतृत्व वही होता है जो कठिन समय में झुकने के बजाय अपने सिद्धांतों पर कायम रहे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “कभी 56 इंच की छाती का दावा नहीं किया, लेकिन जब वक्त आया तो अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के सामने झुकने की बजाय शहादत को प्राथमिकता दी।” उनके इस बयान के बाद सदन में हलचल तेज हो गई और सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने इसका विरोध भी जताया। इकरा हसन का यह बयान साफ तौर पर केंद्र सरकार के नेतृत्व शैली पर सवाल खड़ा करता नजर आया, जिसमें उन्होंने परोक्ष रूप से सरकार की तुलना अंतरराष्ट्रीय नेताओं से कर दी।

अमेरिका ट्रेड डील और ‘दो बड़े ब्लंडर’ का आरोप

इकरा हसन ने अपने भाषण में हाल के दिनों में सरकार द्वारा किए गए दो बड़े फैसलों को “ब्लंडर” करार दिया। उन्होंने कहा कि पहला बड़ा कदम अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील है, जिससे देश को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, बल्कि घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ा है। दूसरा, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को कमजोर किया है। उनके मुताबिक, भारत की पहचान हमेशा एक संतुलित और स्वतंत्र रुख रखने वाले देश की रही है, खासकर खाड़ी देशों के साथ संबंधों में। लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है, जहां भारत अन्य देशों के विवादों में उलझकर खुद नुकसान उठा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव देश के रणनीतिक हितों के लिए चिंता का विषय है।

ईरान-इजरायल विवाद और भारत पर असर

अपने भाषण के अंतिम हिस्से में इकरा हसन ने ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर एशिया में भारत पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि जहां चीन जैसे देश सस्ते तेल का लाभ उठाकर अपने नागरिकों को राहत दे रहे हैं, वहीं भारत में एलपीजी और पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान जैसे पुराने सहयोगी देश के मुश्किल समय में भारत खुलकर उसका साथ नहीं दे सका, जिसका नतीजा आज ऊर्जा आपूर्ति के संकट के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह अपनी विदेश नीति की समीक्षा करे और ऐसे कदम उठाए जिससे देश को आर्थिक और रणनीतिक नुकसान से बचाया जा सके। उनके इस बयान ने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह नई बहस को जन्म दे दिया है।

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