दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में चल रही उस चर्चा पर विराम लग गया, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस के संभावित विलय की अटकलें लगाई जा रही थीं। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक समाप्त होने के बाद कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि टीएमसी के कांग्रेस में विलय को लेकर चल रही सभी खबरें पूरी तरह निराधार और अफवाह हैं। उन्होंने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्षी गठबंधन INDIA को मजबूत करने और आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों पर चर्चा करना था, न कि किसी दल के विलय पर विचार करना।
ममता और राहुल की मुलाकात पर क्या बोले कांग्रेस नेता?
हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी मुलाकात को आधार बनाकर कई तरह की अटकलें सामने आने लगी थीं। हालांकि कांग्रेस ने साफ किया कि यह मुलाकात INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सामान्य राजनीतिक संवाद का हिस्सा थी। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं के बीच मुलाकात होना स्वाभाविक है और इसे किसी राजनीतिक विलय से जोड़कर देखना गलत होगा। कांग्रेस का कहना है कि विपक्षी एकता को मजबूत करना वर्तमान समय की प्राथमिकता है और इसी दिशा में लगातार संवाद जारी है।
महंगाई, पेपर लीक और बेरोजगारी पर कांग्रेस का बड़ा अभियान
बैठक के दौरान देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि ये ऐसे विषय हैं जो सीधे आम जनता को प्रभावित कर रहे हैं। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दो से तीन महीनों में इन मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा। कांग्रेस देशभर में राज्य, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने बैठक में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। पार्टी का फोकस अब रोजगार, शिक्षा और महंगाई जैसे मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से उठाने पर रहेगा।
चुनावी विवादों पर भी कांग्रेस का सरकार और आयोग पर हमला
बैठक में चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कुछ मामलों पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस ने मिनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द किए जाने के मुद्दे को गंभीर बताते हुए सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि बिना पर्याप्त आधार के उनका नामांकन खारिज किया गया, जबकि दूसरे राज्यों में कुछ उम्मीदवारों को राहत दी गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस मामले को लेकर पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मुलाकात कर चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संघर्ष जारी रखेगी। कुल मिलाकर दिल्ली की बैठक ने एक तरफ टीएमसी विलय की अटकलों को खत्म कर दिया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने आने वाले महीनों में जनहित के मुद्दों पर आक्रामक रणनीति अपनाने के संकेत भी दिए हैं।








