उत्तर प्रदेश सरकार की हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई है। इन फैसलों में सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है जो Ola-Uber जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को लेकर लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रदेश में इन कंपनियों को टैक्सी सेवा चलाने के लिए अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कैबिनेट ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस नए नियम के तहत एग्रीगेटर कंपनियों को पंजीयन विभाग में लाइसेंस लेना होगा और यह लाइसेंस पांच साल तक मान्य रहेगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से टैक्सी सेवाओं को व्यवस्थित करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बिना लाइसेंस नहीं चल सकेंगी एग्रीगेटर टैक्सियां
सरकार के नए नियमों के अनुसार अब कोई भी कंपनी या ड्राइवर बिना जरूरी प्रक्रियाएं पूरी किए ओला-उबर जैसी टैक्सी सेवाएं नहीं चला सकेगा। इसके लिए वाहन की फिटनेस, चालक का मेडिकल परीक्षण और पुलिस वेरिफिकेशन जैसे जरूरी दस्तावेज अनिवार्य होंगे। इसके अलावा एग्रीगेटर कंपनियों को लाइसेंस लेने के लिए करीब 5 लाख रुपये का शुल्क भी देना होगा। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह नियम फिलहाल तीन पहिया ऑटो और दो पहिया वाहनों पर लागू नहीं होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से प्रदेश में टैक्सी सेवाओं पर बेहतर नियंत्रण होगा और यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिल सकेगी।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में भी बड़ा बदलाव
कैबिनेट बैठक में स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग से जुड़ा भी एक अहम फैसला लिया गया है। अब किसी भी संपत्ति की बिक्री के समय खतौनी के आधार पर मालिक की पहचान की जाएगी। विभाग यह भी सुनिश्चित करेगा कि संपत्ति बेचने वाला व्यक्ति वास्तव में उसका मालिक है या नहीं। बिना मालिकाना हक की पुष्टि किए अब किसी भी संपत्ति का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा। इसके अलावा नगर निगम क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों पर सर्किल रेट के आधार पर स्टाम्प शुल्क लगेगा और इसके साथ 2 प्रतिशत विकास शुल्क भी अलग से लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रॉपर्टी से जुड़े फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।
आवास योजना और शहरों के विकास पर भी फैसला
कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से जुड़ा भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया गया है। इसके तहत घर बनाने के लिए मिलने वाली आर्थिक सीमा 6.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं कांशीराम योजना के तहत बने मकानों से अवैध कब्जेदारों को हटाकर उन्हें दोबारा तैयार किया जाएगा और फिर उन्हें SC और ST वर्ग के जरूरतमंद परिवारों को आवंटित किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण और नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ जैसे जिलों के विकास के लिए भी धनराशि मंजूर की गई है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से प्रदेश में शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।








