‘अगर दूसरी सरकार होती तो क्या होता?’ राम मंदिर मामले पर राज ठाकरे ने बीजेपी को घेरा

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर राज्य और केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए तीखा हमला बोला है। एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना राजनीति नहीं, बल्कि जनता का अधिकार है। उन्होंने महाराष्ट्र में चल रहे “मिसिंग लिंक” विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि जब विपक्ष या आम लोग सरकार के किसी फैसले पर सवाल उठाते हैं तो उसे राजनीति का नाम दे दिया जाता है। राज ठाकरे ने पूछा कि अगर किसी योजना या परियोजना को लेकर लोग अपनी चिंता जाहिर करें तो उसे महाराष्ट्र का अपमान कैसे माना जा सकता है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

 भाषा और महाराष्ट्र के मुद्दों पर भी जताई नाराजगी

राज ठाकरे ने अपने भाषण में भाषा के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा से उन्हें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन किसी भाषा को लोगों पर थोपना सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि महाराष्ट्र विधानसभा जैसे मंच पर हिंदी में भाषण देने की जरूरत क्यों पड़ती है। उनके अनुसार राज्य के मुद्दों पर चर्चा और संवाद स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर होना चाहिए। ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र का सम्मान और पहचान उनके लिए सबसे ऊपर है और वे किसी भी हाल में राज्य के हितों के खिलाफ जाने वाली बातों को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को राज्य के बुनियादी मुद्दों, शहरों की समस्याओं और लोगों की परेशानियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

रेलवे भर्ती और मराठी युवाओं को लेकर उठाए सवाल

मनसे प्रमुख ने अपने पुराने रेलवे भर्ती आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई साल पहले रेलवे में स्थानीय युवाओं को अवसर दिलाने के लिए आंदोलन किया गया था। उनके मुताबिक उस आंदोलन का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि महाराष्ट्र में होने वाली भर्तियों की जानकारी यहां के युवाओं तक पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि उस संघर्ष के बाद भर्ती परीक्षाओं में स्थानीय भाषाओं को भी जगह मिली और बड़ी संख्या में मराठी युवाओं को रोजगार मिला। राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि अगर महाराष्ट्र में रेलवे की भर्ती होती है तो उसकी जानकारी राज्य के अखबारों और युवाओं तक पर्याप्त रूप से क्यों नहीं पहुंचती। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा के लिए लगातार निगरानी और जागरूकता जरूरी है।

राम मंदिर दान मामले और विकास के मुद्दे पर सरकार को घेरा

अपने संबोधन में राज ठाकरे ने राम मंदिर में कथित दान राशि की गड़बड़ी के मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया धन विवादों में आता है तो उस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। ठाकरे ने सवाल उठाया कि अगर ऐसी घटना किसी दूसरी सरकार के समय होती तो राजनीतिक प्रतिक्रिया कैसी होती। इसके साथ ही उन्होंने मुंबई की स्थिति, बारिश के दौरान होने वाली परेशानियों और लगातार चल रहे निर्माण कार्यों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विकास केवल बड़े प्रोजेक्ट बनाने का नाम नहीं है, बल्कि लोगों को बेहतर सुविधाएं देना भी उतना ही जरूरी है। वहीं उन्होंने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा और कहा कि जनता को हर फैसले की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उनके इन बयानों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

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