एक तरफ ईरान अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की मौत के बाद गहरे सदमे में है, तो दूसरी तरफ सात समंदर पार अमेरिका से आए एक बयान ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। तेहरान की सड़कों पर करीब एक करोड़ (10 मिलियन) लोगों का हुजूम अपने नेता को अंतिम विदाई देने उमड़ा था, जिसे इतिहास के सबसे बड़े जनाजों में से एक माना जा रहा है। इस भावुक माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद विवादित और तीखा बयान दे डाला। ट्रंप ने तेहरान में जुटी इस ऐतिहासिक भीड़ पर तंज कसते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं, जिसने न सिर्फ कूटनीतिक मर्यादाओं को तार-तार किया, बल्कि पश्चिम एशिया में पहले से सुलग रही बारूद की ढेर में चिंगारी लगाने का काम भी कर दिया है।
क्या था ट्रंप का वो बयान जिसने सबको चौंकाया?
खामेनेई के प्रति ईरान के आम लोगों की यह दीवानगी और श्रद्धा शायद अमेरिकी राष्ट्रपति को रास नहीं आ रही है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान का पूरा शीर्ष नेतृत्व इस वक्त एक ही जगह पर मौजूद है और अमेरिका चाहे तो महज ‘एक शॉट’ में उन सभी का नामोनिशान मिटा सकता है। हालांकि, उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ा कि वे ऐसा करेंगे नहीं, क्योंकि अगर सब खत्म हो गए तो फिर अमेरिका बातचीत किससे करेगा? ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने दावा किया कि ईरान इस समय अमेरिका के सामने किसी बड़ी डील के लिए गिड़गिड़ा रहा है। ट्रंप के इस तेवर और भड़काऊ भाषा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति के प्रयासों को बड़ा झटका दिया है और इसी बयान ने अब भारत की घरेलू राजनीति में भी एक नया तूफान खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस का मोदी सरकार पर तीखा हमला और ‘चुप्पी’ पर सवाल
अमेरिका और ईरान के इस महाविवाद के बीच अब भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी कूद पड़ी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर ट्रंप के इस बयान को लेकर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब भारत के आधिकारिक प्रतिनिधि इस अंतिम संस्कार में शामिल होने और शोक जताने ईरान गए हुए हैं, ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति की यह हिंसक और गैर-जिम्मेदाराना धमकी बेहद चिंताजनक है। खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस तथाकथित मजबूत सरकार में इतनी नैतिक हिम्मत भी नहीं बची है कि वह वाशिंगटन में बैठे अपने ‘आकाओं’ के इस भड़काऊ बयान की खुलकर निंदा कर सके। कांग्रेस ने सरकार की इस ‘खामोशी’ को उसकी समझौतावादी नीति का नतीजा बताया है।
वैश्विक तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक परीक्षा
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत के सामने एक बड़ी राजनयिक चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ जहां भारत के ईरान के साथ बेहद पुराने और रणनीतिक संबंध हैं (खासकर चाबहार पोर्ट को लेकर), वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी नई ऊंचाइयों पर है। कांग्रेस का मानना है कि ऐसे संवेदनशील वक्त पर भारत को मूकदर्शक बने रहने के बजाय वैश्विक शांति के पक्ष में अपनी आवाज मुखर करनी चाहिए। ट्रंप की इस नई धमकी के बाद अब हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विदेश मंत्रालय इस तीखी बयानबाजी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगा या फिर इस अंतरराष्ट्रीय विवाद से खुद को पूरी तरह दूर रखकर ‘वेट एंड वॉच’ की नीति पर ही आगे बढ़ेगा।
Read more-राम मंदिर चढ़ावा मामले पर पहली बार बोले मोहन भागवत, एक बयान से साफ कर दिया अपना रुख








