संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और संसद मार्च के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक ही दिन में दो बार मुलाकात चर्चा का विषय बन गई। पहली बैठक में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं, जबकि बाद में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच अलग से बातचीत हुई। दोनों नेताओं की लगातार हुई बैठकों ने सियासी गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया। हालांकि दोनों दलों की ओर से बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। संसद सत्र के दौरान विपक्ष की साझा रणनीति और आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
आंदोलन, राम मंदिर मामला और यूपी की राजनीति पर हुई चर्चा
जानकारी के मुताबिक बैठक में अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले सहित कई राजनीतिक विषयों पर चर्चा हुई। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की राजनीति और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों के बीच भविष्य में बेहतर तालमेल बनाने और विभिन्न मुद्दों पर साझा रुख अपनाने को लेकर भी बातचीत हुई। संसद के भीतर और बाहर सरकार को किन मुद्दों पर घेरा जाए, इस पर भी चर्चा होने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार दो बैठकों ने विपक्षी एकजुटता को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और युवा प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। इस दौरान प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग दावे और बयान सामने आए। विपक्ष ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई और संसद के भीतर भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से युवाओं की चिंताओं का समाधान करने की मांग की और इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता बताई।
सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
छात्र आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा कर दी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार और पेपर लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय करने की है। अब संसद के मानसून सत्र में इन मुद्दों पर क्या चर्चा होती है और सरकार का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। दूसरी ओर, राहुल गांधी और अखिलेश यादव की लगातार हुई बैठकों ने विपक्ष की आगामी रणनीति को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इन मुद्दों पर सियासत और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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