10 बार मुख्यमंत्री बनने के बाद अचानक इस्तीफा, जानें नीतीश कुमार नें कब-कब ली शपथ?

Nitish Kumar: 14 अप्रैल 2026 का दिन बिहार की राजनीति के लिए ऐतिहासिक बन गया, जब लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे Nitish Kumar ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। करीब दो दशकों तक राज्य की सत्ता की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार का यह फैसला अचानक जरूर लग रहा है, लेकिन इसके पीछे सियासी रणनीति और भविष्य की राजनीति के संकेत भी छिपे माने जा रहे हैं। “सुशासन बाबू” के नाम से मशहूर नीतीश कुमार ने कई बार सत्ता छोड़ी और फिर वापसी की, लेकिन इस बार उनका कदम एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल इस्तीफा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है।

10 बार सीएम बनने का रिकॉर्ड

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बेहद अनोखा रहा है। वे देश के ऐसे नेता बने जिन्होंने सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पहली बार 3 मार्च 2000 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन उनकी सरकार मात्र 7 दिन ही चल सकी। इसके बाद 2005 में उन्होंने जोरदार वापसी की और जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के साथ सरकार बनाई। 2010 में प्रचंड बहुमत के साथ फिर सत्ता में आए। इसके बाद 2015, 2017, 2020, 2022, 2024 और 2025 में अलग-अलग गठबंधनों के साथ उन्होंने बार-बार सत्ता में वापसी की। उनकी राजनीति की खासियत रही कि वे परिस्थिति के अनुसार फैसले लेते रहे और हर बार खुद को सत्ता के केंद्र में बनाए रखा।

गठबंधन बदलने की राजनीति में माहिर

नीतीश कुमार की राजनीति का सबसे दिलचस्प पहलू उनका गठबंधन बदलने का अंदाज रहा है। कभी एनडीए के साथ तो कभी महागठबंधन के साथ, उन्होंने हर बार नई राजनीतिक समीकरण बनाई। 2015 में उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई, लेकिन 2017 में अचानक एनडीए में वापसी कर ली। फिर 2022 में उन्होंने भाजपा से अलग होकर महागठबंधन का दामन थामा और 2024 में फिर एनडीए में लौट आए। यह राजनीतिक लचीलापन ही उनकी ताकत भी बना और आलोचना का कारण भी। बावजूद इसके, वे लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में बने रहे।

आगे की राजनीति पर टिकी नजरें

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी। माना जा रहा है कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुभव और राजनीतिक समझ को देखते हुए आने वाले समय में वे केंद्र की राजनीति में सक्रिय नजर आ सकते हैं। फिलहाल बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है और कुछ ही घंटों में नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार के बिना बिहार की राजनीति किस तरह करवट लेती है।

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