मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने वैश्विक राजनीति और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी नौसेना द्वारा लागू की गई सख्त नाकेबंदी के बावजूद चीन का तेल टैंकर Rich Starry होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहा। यह वही जहाज है जिसे पहले अमेरिकी दबाव के चलते वापस लौटना पड़ा था, लेकिन कुछ घंटों बाद इसने फिर से अपनी यात्रा शुरू की और आखिरकार खाड़ी से बाहर निकल गया। शिपिंग डेटा के अनुसार यह टैंकर करीब छह घंटे तक पर्शियन गल्फ में रुका रहा और फिर ईरान के अनुमोदित मार्ग का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ गया। इस घटनाक्रम को अमेरिका की रणनीति के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
पहली बार टूटी अमेरिकी रणनीति
अमेरिका की ओर से लागू किए गए नेवल ब्लॉकेड का मकसद ईरान से जुड़े व्यापार को रोकना था, लेकिन Rich Starry ने इस रणनीति को पहली बार खुली चुनौती दे दी। यह जहाज न केवल नाकेबंदी के बाद इस रास्ते से गुजरने वाला पहला टैंकर बना, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि वैश्विक व्यापारिक हितों के सामने सैन्य दबाव हमेशा प्रभावी नहीं होता। इस पूरे घटनाक्रम को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नीतियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जिनकी रणनीति ईरान पर आर्थिक और सामरिक दबाव बढ़ाने की रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं आने वाले समय में अमेरिका की समुद्री नीति को प्रभावित कर सकती हैं।
पहले से बैन, फिर भी जारी है कारोबार
रिपोर्ट्स के अनुसार इस टैंकर और इससे जुड़ी कंपनी पर अमेरिका पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है। Shanghai Xuanrun Shipping Company पर आरोप है कि वह ईरान के साथ व्यापार में शामिल है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है। बावजूद इसके, यह जहाज करीब 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लेकर आगे बढ़ा, जिसे उसने यूएई के हमरिया पोर्ट से लोड किया था। इस टैंकर पर पूरी तरह से चीनी क्रू मौजूद है। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद कुछ देश अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे वैश्विक तनाव और बढ़ सकता है।
एक और जहाज की हलचल ने बढ़ाई चिंता
इस घटनाक्रम के बीच एक और टैंकर Murli Kishan भी चर्चा में आ गया है, जो उसी रूट की ओर बढ़ता हुआ देखा गया। हालांकि यह जहाज फिलहाल खाली बताया जा रहा है, लेकिन इसके जल्द ही इराक से ईंधन लोड करने की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस जहाज का पहले नाम MKA था और इसका इस्तेमाल रूस और ईरान भी कर चुके हैं। लगातार ऐसे जहाजों की आवाजाही से यह साफ संकेत मिल रहा है कि क्षेत्र में तनाव के बावजूद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह से थमी नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका इस चुनौती से निपटने के लिए क्या नई रणनीति अपनाता है और क्या इससे वैश्विक स्तर पर किसी बड़े टकराव की स्थिति बनती है।
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